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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Satya Niketan incident a serious lapse; negligence shattered students' dreams: High Court

सत्य निकेतन हादसा गंभीर चूक, लापरवाही ने छात्रों के सपने किए चकनाचूर : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 07:45 PM IST
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कहा-छोटे शहरों से कॅरिअर बनाने दिल्ली आए थे छात्र, हॉस्टल सुविधाओं और पीजी व्यवस्था पर अदालत ने जताई चिंता
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सत्य निकेतन में बहुमंजिला हॉस्टल भवन ढहने की घटना को साधारण दुर्घटना मानने से इनकार किया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले छात्र छोटे शहरों से करियर बनाने की उम्मीद लेकर राजधानी आए थे, लेकिन कुछ लोगों के लापरवाह और आपराधिक आचरण ने उनकी सारी उम्मीदें खत्म कर दीं।
पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि छात्रों की मौत बेहद दुखद है। यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी। छात्र छोटे कस्बों से दिल्ली आए थे और उनके सपने व उम्मीदें थीं। कुछ लोगों के लापरवाह और आपराधिक आचरण ने सब कुछ नष्ट कर दिया।
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सत्य निकेतन स्थित यह भवन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास बॉयज पेइंग गेस्ट हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। छह सितंबर को भवन में मरम्मत का काम चल रहा था, इसी दौरान इमारत ढह गई। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें छात्र भी शामिल थे। कई लोग घायल भी हुए।
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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि घटना के बाद अधिकारियों ने कई कदम उठाए हैं। इनमें छात्रों के लिए जमीन और अन्य सुविधाओं का सक्रिय मानचित्रण और चिह्नांकन भी शामिल है। हालांकि, पीठ ने कहा कि दिल्ली में हॉस्टल सुविधाओं की कमी कोई नई समस्या नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि उच्च शिक्षा के लिए छात्र लगातार दिल्ली आ रहे हैं और पिछले 20-25 वर्षों से कॅरिअर बनाने की उम्मीद में राजधानी पहुंच रहे हैं। ऐसे में सत्य निकेतन जैसी घटना गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में घटना की स्वतंत्र जांच, सभी पेइंग गेस्ट सुविधाओं के निरीक्षण तथा पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास योजना की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस याचिका की सुनवाई एक अन्य लंबित याचिका के साथ 25 सितंबर को होगी।

अब तक क्या हुआ
इससे पहले सात सितंबर को हाईकोर्ट ने घटना की उच्चस्तरीय एमसीडी जांच का आदेश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। पीठ ने कहा था कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय या सरकार के हॉस्टल समेत अपर्याप्त आवास सुविधाओं, छात्रों की सुरक्षा और पीजी सुविधाओं के नियमन में एमसीडी व अन्य अधिकारियों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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