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सजा के बाद भी कम नहीं हुई हैं सज्जन की मुश्किलें

Tue, 18 Dec 2018 05:47 AM IST
राजेश सैनी विजय सिंघल, नई दिल्ली
विजय सिंघल, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Tue, 18 Dec 2018 05:47 AM IST
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Sajjan Kumar problems not reduced even after the sentence in matter of 1984 sikh roits
सज्जन कुमार - फोटो : self

कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन कुमार को ताउम्र कैद की सजा मिलने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उन्हें निचली अदालत से राहत मिलती रही है और पहले मामले में हाईकोर्ट से सजा मिली है। एक अन्य मामले में भी चश्मदीद गवाह ने अदालत के समक्ष उनकी पहचान की थी और इस मामले में भी जल्द फैसला आ सकता है। उन पर करीब आधा दर्जन मामले अभी भी लंबित है। सज्जन से पहले कांग्रेस के ही दिग्गज नेता एचकेएल भगत भी एक गवाह के बयान के आधार पर जेल भेजे गए थे, लेकिन उनकी मौत के कारण मामले को बंद करना पड़ा। 

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अभी भी करीब आधा दर्जन मामले लंबित, गवाह कर चुके हैं शिनाख्त 

सज्जन कुमार दिल्ली में कांग्रेस के एक मात्र ऐसे नेता मान जाते है जिनका रुतबा है और भीड़ जुटाने में सक्षम है। उनको सजा होने के बाद पूरी कांग्रेस ने चुप्पी साध ली है। दरअसल सज्जन के भाई रमेश कुमार भी सांसद रह चुके है जबकि बेटा जगप्रवेश राजनीति में पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। नवंबर 84 दंगों के बाद से ही पूर्व सांसद सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर व दिवंगत एचकेएल भगत का नाम आरोपियों के तौर पर प्रमुखता से लिया जाता रहा है। एचकेएल भगत का पूर्वी दिल्ली में एकछत्र राज चलता था। अदालत ने गवाह सतनामी बाई के बयान के आधार पर जमानत रद्द कर उन्हें जेल भेजा था तब काफी हंगामा हुआ था।

 
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सज्जन से पहले कांग्रेस के भगत भी जा चुके है जेल, मृत्यु के बाद मामला हुआ बंद 

सज्जन कुमार का रुतबा इतना रहा है कि जब सीबीआई उन्हें गिरफ्तार करने मादीपुर स्थित उनके घर गई थी तो जमकर हंगामा हुआ था और उसके बाद से कभी भी सीबीआई या पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं दिखाई। उनके खिलाफ दिल्ली कैंट इलाके के अलावा सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी नांगलोई इत्यादि इलाकों में हुए दंगो के मामले विचाराधीन हैं। इनमें से सुल्तानपुरी के मामले में चश्मदीद गवाह शीला कौर व चामकौर ने अदालत के समक्ष शिनाख्त कर बताया था कि सज्जन के उकसावे के कारण ही उनके परिवार के सदस्यों को जिंदा जलाकर मार दिया गया था।  

 
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अब संदेह का लाभ मिलने की गुंजाइश कम 

इसके अलावा अन्य मामलों में भी गवाही चल रही है ओर संभावना जताई जा रही है कि अगले वर्ष यानि 2019 में सभी मामलों में फैसला आ जाए।कानून के जानकारों का मानना है कि जिस प्रकार हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को सजा सुनाई है उसका असर अन्य मामलों में पर भी पड़ेगा। अभी तक सज्जन कुमार को संदेह का लाभ मिलता रहा है, लेकिन अब कम ही संभावना है। हालांकि अदालत को फैसला गवाहों व दस्तावेजों के आधार पर करना होता है लेकिन अब सज्जन की राह आसान नहीं है। इस फैसले के बाद जगदीश टाइटलर की भी मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल हथियार व्यवसायी अभिषेक वर्मा का आरोप है कि टाइटलर ने गवाहों को खरीदने का प्रयास किया था। अभिषेक वर्मा का हाल ही में लाई डिटेक्टर टेस्ट हुआ है और रिपोर्ट उनके खिलाफ हुई तो तय है कि टाइटलर भी लपेटे में आ सकते हैं। 
 

सज्जन को जाना ही होगा जेल 

सज्जन कुमार हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे। उनके वकील का कहना है कि इन गवाहों के बयान पहले ही दर्ज हो चुके थे और अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था लेकिन अब उन्हीं गवाहों के बयानों पर सजा कैसे दी जा सकती है। सज्जन को अपील दायर करने से पूर्व हर हाल में समर्पण करना ही होगा। इसके अलावा जुर्माने की राशि भी जमा करवानी होगी। अपील दायर करने के लिए यह कानूनन जरूरी है। इसी के बाद सर्वोच्च न्यायालय तय करेगा कि सज्जन को अपील के निपटारे तक जमानत प्रदान की जाए या नहीं।

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