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आरटीआई- विभागों की लेटलतीफी ने ले ली तीन महिलाओं की जान

Sat, 17 Dec 2016 05:09 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 17 Dec 2016 05:09 PM IST
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rti reply says departmental delay took three women lives
आरटीआई

अब तक हम कोर्ट केस के मामले में लेटलतीफी के मामले सुनते थे। कुछ इसी तरह का हाल अब आरटीआई आवेदकों का होने लगा हैं। गरीब तबके की तीन महिलाओं की पेंशन बिना बताए रोक दी गई। पैसे के अभाव में उनका इलाज रुक गया।

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पेंशन रुकने का कारण विभाग ने वक्त पर आरटीआई से भी नहीं बताया। महीनों तक जानकारी की आस में बैठीं इन महिलाओं की मौत हो गई। ये तीनों महिलाएं  दिल्ली के झुग्गी क्षेत्र लाल गुम्बद कैम्प की थीं। एक्ट के तहत इस तरह के मामले जीवन औैर स्वतंत्रता से जुड़े होते हैं। इनका जवाब हर हाल में 48 घंटे में देना होता है।
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55 वर्षीय धर्मो की विधवा पेंशन जुलाई 2013 में बिना सूचना दिए रोक दी गई थी। अस्थमा से पीड़ित धर्मो ने एक साल बाद आरटीआई फाइल कर जवाब मांगा। इस बीच धर्मो का अस्थमा का इलाज रुक गया।  तमाम जद्दोजहद के बाद हालांकि उन्हें पूरी पेंशन मिल तो गई लेकिन उनकी मौत के चंद दिन पहले ही। जनवरी 2016 में उनकी अस्थमा से मौत गई।

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ब‌िना कारण बताए बंद कर दी थी पेंशन

rti reply says departmental delay took three women lives

57 वर्षीय इमरती देवी की मौत 10 नवंबर 2016 को हो गई थी। उनका कूल्हे में फ्रैक्चर का इलाज चल रहा था। मृत्यु के डेढ़ साल पहले महिला एवं बाल विकास विभाग से विधवा पेंशन बंद होने के कारण उनका इलाज रुक गया।

कारण पूछने के लिए उन्होंने अगस्त 2016 में आरटीआई फाइल की। हालांकि आरटीआई लगाने के एक माह बाद ही इन्हें पेंशन के 12 हजार रुपये मिल गए थे। डेढ़ साल बाद इनका इलाज शुरू तो हुआ लेकिन कोई सुधार नहीं आया।

उधर, रुक्मिणी देवी नगर निगम की लेटलतीफी का सबसे ज्यादा शिकार हुईं। विभाग ने फरवरी 2009 में इनकी वृद्घा पेंशन बिना कारण बताए बंद कर दी थी। इन्होंने कारण जानने के लिए अक्टूबर 2009 में आरटीआई आवेदन किया। सही जवाब न मिलने पर दिसंबर 2009 में पहली अपील फाइल की । इसके बाद इन्होंने मार्च 2010 में केन्द्रीय सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया । जब तक सुनवाई की तारीख आती तब रुक्मिणी की 72 साल की उम्र में मृत्यु हो चुकी थी।

संस्था सतर्क नागरिक संगठन की सदस्या अमृता जौहरी ने बताया कि पेंशनर्स की पूरी जानकारी सभी विभागों को आरटीआई एक्ट की धारा सेक्शन 4 के तहत खुद ब खुद सार्वजनिक करनी चाहिए।

पेंशन और राशन से संबंधित मामले जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ी जानकारी से संबंधित होते हैं। इसलिए आवेदक को अपने आरटीआई आवेदन में ऊपर लिखना चाहिए कि यह लाइफ एंड लिबर्टी का मामला है कृपया इसका जवाब 48 घंटे के अंदर देने का कष्ट करें। सभी जन सूचना अधिकारियों को इस तरह के मामलें को बेहद संजीदगी से लेने की जरूरत है ।-श्रीधर आचार्युलु, सूचना आयुक्त, सीआईसी 

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