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6 घंटे के भीतर ही दिल्ली के 180 डॉक्टरों को डबल प्रमोशन, RTI से हुआ खुलासा
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 29 Jun 2018 08:24 PM IST
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दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की सामने आई आरटीआई ने बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। इसके अनुसार दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों में तैनात करीब 180 से ज्यादा डॉक्टरों ने महज छह घंटे के भीतर डबल प्रमोशन पा लिया। आरोप है कि बंद कमरे में तीन अधिकारियों ने एक ही दिन में दो बार बैठक कर कागजों का हवाला देते हुए डॉक्टरों को डबल प्रमोशन दे दिया।
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हालांकि ये बैठक दो वर्ष पहले दिल्ली सचिवालय में हुई थी लेकिन आरटीआई और शिकायत अब सामने आने के बाद मामला सीबीआई तक पहुंच चुका है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले माह स्वास्थ्य सचिव से सीबीआई ने अहम दस्तावेज भी मांगे हैं। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग से एक आरटीआई के जरिए दिल्ली के ही एक सरकारी डॉक्टर ने डबल प्रमोशन पर जानकारी मांगी थी।
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जवाब में बताया गया कि 2016 में डाइनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्राम (डीएसीपी) के तहत दिल्ली स्वास्थ्य सेवा कैडर के 185 नॉन टीचिंग स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का ग्रेड तीन से दो और इन्हीं में से 183 डॉक्टरों का ग्रेड दो से एक में प्रमोशन किया है। 16 अगस्त 2016 को डॉक्टरों की इस लिस्ट पर तत्कालीन अतिरिक्त सचिव आशीष गोयल ने मंजूरी भी दे दी, जबकि उनका भी नाम इस लिस्ट में 29वें नंबर पर है। सीबीआई को भेजी शिकायत में डॉक्टर ने बताया कि बैठक में महज तीन ही अधिकारी मौजूद थे। बैठक का नोटिस 26 जुलाई 2016 को दिया गया और अगले ही दिन बैठक में डबल प्रमोशन दे दिया।
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आपत्ति वाले अफसर पीछे हटे
RTI
कई बार करने पड़ते हैं हस्ताक्षर
बैठक में बतौर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन के रूप में मौजूद रहे डॉ. जेएस पासी का कहना है कि कई बार बगैर जानकारी के भी फाइल पर हस्ताक्षर करने होते हैं। उस दौरान वे बैठक में मौजूद थे और फाइल पर उनके हस्ताक्षर हैं। लेकिन इस फैसले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। डॉ. पासी ने पूरी घटना से खुद को अलग रखते हुए कहा है कि इस फाइल को तत्कालीन डीन के तौर पर ही देखना चाहिए।
आपत्ति वाले अफसर पीछे हटे
पहचान छिपाने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों को इस पर आपत्ति थी, वे बैठक में मौजूद नहीं रहे। नियमानुसार कम से कम तीन सदस्यों की जरूरत होती है। लेकिन इनमें से एक सर्विसेज विभाग के सचिव भी होने चाहिए, जोकि बैठक में आए ही नहीं। जबकि कागज पर डॉ. पासी और स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन सचिव डॉ. तरुण सीम के हस्ताक्षर हैं।
बैठक में बतौर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन के रूप में मौजूद रहे डॉ. जेएस पासी का कहना है कि कई बार बगैर जानकारी के भी फाइल पर हस्ताक्षर करने होते हैं। उस दौरान वे बैठक में मौजूद थे और फाइल पर उनके हस्ताक्षर हैं। लेकिन इस फैसले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। डॉ. पासी ने पूरी घटना से खुद को अलग रखते हुए कहा है कि इस फाइल को तत्कालीन डीन के तौर पर ही देखना चाहिए।
आपत्ति वाले अफसर पीछे हटे
पहचान छिपाने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों को इस पर आपत्ति थी, वे बैठक में मौजूद नहीं रहे। नियमानुसार कम से कम तीन सदस्यों की जरूरत होती है। लेकिन इनमें से एक सर्विसेज विभाग के सचिव भी होने चाहिए, जोकि बैठक में आए ही नहीं। जबकि कागज पर डॉ. पासी और स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन सचिव डॉ. तरुण सीम के हस्ताक्षर हैं।