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आरटीआई: स्टाफ की कमी है, नहीं दे सकते सूचना

Sat, 03 Sep 2016 02:48 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Sep 2016 02:48 PM IST
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RTI : department says due to lack of staff we can't provide information
- फोटो : demo
उत्तर प्रदेश में आरटीआई के तहत सूचना देने में हीलाहवाली करने का एक मामला सामने आया है। आरटीआई आवेदन के तहत उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग से शिकायत और अपील संबंधी जानकारी मांगी गई थी।
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आयोग ने सूचना यह कहकर देने से मना कर दिया कि आयोग में कर्मचारियों कमी के कारण ऐसी सूचना दिया जाना संभव नहीं है। यही नहीं आयोग को आरटीआई का जवाब देने में 50 दिन से ज्यादा लग गए। जबकि आरटीआई एक्ट के तहत हर हाल में 30 दिन में जवाब देना होता है।
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अमर उजाला को प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआई आवेदन 16 जून 2016 को उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में लगाई गई थी। जिसका जवाब आयोग ने 8 अगस्त को दिया। आरटीआई से नौ बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
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जिसमें से आयोग ने छह बिंदुओं पर जवाब दिया कि उत्तर प्रदेश आरटीआई नियमावली-2015 के नियम 4 (2)(ख)(पांच) और स्टाफ की कमी का हवाला देकर जानकारी देने से मना कर दिया।  इस नियम में कहा गया है ऐसी जानकारी देना संभव नहीं है जिसकी विस्तृत सूचना और संकलन में आनुपातिक रूप से आयोग की दक्षता प्रभावित होगी।

मांगी गई थीं ये जानकार‌ियां

RTI : department says due to lack of staff we can't provide information
आरटीआई

दरअसल, जो जानकारी आयोग से मांगी गई थी वो सभी जानकारी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज किए जाने का प्रावधान है और इस रिपोर्ट को हर साल तैयार कर विधानसभा के पटल पर रखा जाता है।

इसके बाद यह रिपोर्ट आयोग की वेबसाइट और हार्ड कॉपी के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है। लेकिन आयोग की वेबसाइट पर ऐसी कोई रिपोर्ट न देख आरटीआई के माध्यम से शिकायत व अपील संबंधी जानकारी मांगी गई थी।

आरटीआई आवेदन में आयोग से यह भी पूछा गया था कि प्रदेश में कुल कितनी पब्लिक अथॉरिटी हैं। इसके जवाब में आयोग ने संख्या बताने की बजाय पब्लिक अथॉरिटी की परिभाषा बता डाली। इसके अलावा आरटीआई आवेदन में स्पष्ट लिखा हुआ था कि आवेदक के पास इंटरनेट सुविधा नहीं है, फिर भी आयोग ने सूचना आयुक्तों के संपर्क के बारे में पूछने पर जवाब दिया कि इसके लिए आयोग की वेबसाइट देखें।

पिछले पांच साल की ये जानकारी मांगी थी-
1- कितनी अपील और शिकायतें रजिस्टर्ड और निलंबित हुई।
2- कितनी अपील और शिकायतें वापस की गई। 
3- कितने मामलों में आयोग ने पेनाल्टी लगाई।
4- विभिन्न पब्लिक अथॉरिटी से कितने आवेदनों को लौटा दिया गया।
5- गरीबी रेखा से नीचे वर्ग के कितने आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए।

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