चंद्रमोहन की 'लव स्टोरी' के 5 नए खुलासे
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ग्रेटर नोएडा में अपनी मौत झूठा ड्रामा रचने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन को शुक्रवार को भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच न्यायालय में पेश किया। जहां से उसको 50 घंटे की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। चंद्रमोहन के साथ मिली युवती को परिजनों को सुपुर्द कर दिया है।
शुक्रवार को चंद्रमोहन को पेश करने के दौरान उसे देखने वालों की भीड़ लग गई। कासना पुलिस उसे पुख्ता सुरक्षा के बीच न्यायालय लेकर आई थी। इस दौरान आरोपी पक्ष के गांवों के लोग भी जमा हो गए। चंद्रमोहन के आने से पहले सीजेएम न्यायालय के सामने और पीछे पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
भीड़ को न्यायालय से दूर हटाने और पीएसी के घेरा बनाने के बाद चंद्रमोहन को लेकर कासना पुलिस की जीप पहुंची। चंद्रमोहन को भीतर ले जाने के बाद कोर्ट के गेट बंद कर दिए गए। चंद्रमोहन के वकील ने बेल के लिए आवेदन किया। इस पर कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया गया। चंद्रमोहन को 50 घंटे की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
चंद्रमोहन के मौत के ड्रामे में और भी कई बड़े खुलासे हुए हैं। पढ़िए आगे की स्लाइड में-
पुलिस से बचने के लिए मिटाई 'खास' पहचान
चंद्रमोहन ने एक बेकसूर को कार में जिंदा जलाने के बाद खुद को बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाया। बंगलूरू में रहने के दौरान उसने अपना पूरा हुलिया बदल लिया, ताकि कोई उसे पहचान न सके। दाढ़ी-मूंछ भी कटवा ली।
बताया जा रहा है कि घर की कलह और दूसरी लड़की से प्रेम ने चंद्रमोहन को जुनूनी बना दिया। उसने साजिश रची और अपने लिए एक अलग जिंदगी चुन ली। इसके बाद चंद्रमोहन परी चौक से बस में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो गया था।
वहां से ट्रेन में सवार होकर बंगलूरू गया और रास्ते में ही उसने बाल और दाढ़ी-मूंछ कटवाकर पहचान बदलने की कोशिश की। चंद्रमोहन के बालों में चोटी और माथे पर तिलक कभी उसकी पहचान हुआ करता था। उसने कभी चोटी नहीं कटवाई थी और उसे कभी बिना तिलक के नहीं देखा गया था।
हालांकि चंद्रमोहन की ये होशियारी उसके काम नहीं आई और आखिरकार वह पुलिस के चंगुल में फंस ही गया।
गर्लफ्रेंड को लेने आया था परीचौक
एक मई की रात को कार में आग लगने के बाद वह छह जून को वापस ग्रेटर नोएडा आया था। शाम के करीब सात बजे उसने सिर पर तौलिया डाला हुआ था और चेहरा भी ढंक रखा था।
उसने युवती को फोन करके परी चौक बुलवाया और वहां से दोनों दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान पूरे देश में उसकी मौत की खबरें हेडलाइन बन रही थीं, लेकिन इसके बावजूद वह ग्रेनो वापस आने से नहीं कतराया। परी चौक चौकी के पास भी करीब एक घंटे तक रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।
चंद्रमोहन की इस पूरी साजिश में उसके साले विदेश ने पूरा साथ दिया। कुछ पैसों और नौकरी की लालच में आकर विदेश ने अपनी बहन को विधवा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
विदेश ने अपनी बहन की मांग का सिंदूर मिटाया था, जबकि उसका पति चंद्रमोहन अपनी प्रेमिका के साथ रंगरेलियां मनाने में ख्वाब पाल रहा था।
इंटरनेट से लेता था ग्रेनो की खबर
बंगलूरू में चंद्रमोहन रोजाना एक घंटे इंटरनेट पर बिताता था और ग्रेटर नोएडा की खबरें ई-पेपर पर पढ़ता था। उसकी कोशिश थी कि ग्रेनो के हालात से वह हर वक्त वाकिफ रहे।
शुक्रवार को पुलिस ने चंद्रमोहन को अदालत में पेश किया। इससे पहले उसने एक परिचित को थाने में बुलाया और कहा कि पत्नी को वकील से संपर्क करने को कहे। वकील पहले से ही चंद्रमोहन ने तय कर रखा था।
एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति से चंद्रमोहन ने अप्रैल के अंत में 14 लाख रुपये लिए थे। जिसकी एवज में उसे अपना मकान बेचना था। रजिस्ट्री से पहले ही उसने अपनी मौत का नाटक रच दिया। एसपी ने बताया कि इस बारे में भी चंद्रमोहन से पूछताछ की जाएगी।
करप्शन फ्री इंडिया ने शुक्रवार को थाने में जमकर प्रदर्शन किया और चंद्रमोहन को फांसी दिए जाने की मांग की। इस मौके पर प्रवीण भारतीय, जतन भाटी, पवन कुमार, आलोक नागर, दिनेश भाटी, राहुल भाटी, पकंज शर्मा, जगदीश दादूपुर, सुदेश सिंह और किरनपाल आदि मौजूद रहे।
सबसे बड़ा दगाबाज है 'विदेश'
चंद्रमोहन शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की दो टीमें उसके साले विदेश की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर दबिश दे रही हैं। चंद्रमोहन और युवती के परिजनों के फोन की कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही हैं ताकि उससे कोई सुराग लगे।
चंद्रमोहन की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद से उसका साला भी फरार हो गया था। पुलिस ने उसके घर, कासना गांव और कई रिश्तेदारों के यहां भी छापा मारा, लेकिन वो हत्थे नहीं चढ़ा। विदेश का फोन भी बंद है। चंद्रमोहन के जिंदा होने की जानकारी विदेश को थी, लिहाजा उसने करीब डेढ़ माह पहले ही पुलिस से दूरी बना ली थी।
चंद्रमोहन पकड़ में आया तो वो फरार हो गया। दरअसल, चंद्रमोहन का प्लान कामयाब होने के बाद विदेश ने ही चंद्रमोहन की नौकरी का फंड लेने की मांग की थी। इसके अलावा उसने अपने और बहन के लिए असलहे की डिमांड की थी।
सख्ती से जांच के लिए जब मामला कासना कोतवाली के तत्कालीन एसओ प्रवीण यादव को सौंपा गया तो उन्होंने विदेश से भी पूछताछ की। उन्होंने चंद्रमोहन के साले से पूछा कि वह वारदात की रात घटना स्थल के आसपास क्या कर रहा था। इस सवाल ने विदेश को सतर्क कर दिया और उसने पुलिस से दूरी बनाने में ही भलाई समझी।
बेकसूरों को मिली चंद्रमोहन के 'प्यार' की सजा
चंद्रमोहन ने खुद के मरने का प्लान बनाया और उसकी हत्या के आरोप में एक पूरा परिवार पुलिस पूछताछ और लगातार दबिश के चलते परेशान रहा। नौबत ये आ गई कि परेशान होकर इस परिवार ने गांव छोड़ दिया। फसल बर्बाद हो गई, बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाई और इन्हीं दिक्कतों के चलते एक महिला की हार्ट अटैक से मौत तक हो गई। करनी चंद्रमोहन की थी, लेकिन इसकी सजा बेकसूरों ने भुगती।
कार में चंद्रमोहन के जलने के मामले में पत्नी सविता शर्मा ने कासना के किसान बृजेश उसके दो भाइयों ज्ञानी, राजकुमार और बेटों आनंद और प्रवीण के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जबकि तब ये परिवार वैलाना गांव में गेंहू की निकासी करवा रहा था। सूचना मिलते ही सभी लाखों की फसल खेत पर छोड़कर चले गए।
इसके बाद शुरू हुआ लगातार दबिश का सिलसिला। रिश्तेदारों के यहां भी दबिश दी गई। ये लोग बताते हैं कि इस दौरान पुलिस का व्यवहार बेहद अमानवीय रहा। परिवार की महिलाओं से भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता था। जैसे-जैसे गिरफ्तार के लिए नोएडा में प्रदर्शन होता। पुलिस की सख्ती और ज्यादती बढ़ जाती थी।
ये बताते हैं कि भाई और बच्चों को हिरासत में लेकर पुलिस ने आठ दिनों तक मारपीट की। हत्या का झूठा केस लगने के बाद बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई। बच्चे पढ़ना चाहते थे। कोई कानून की पढ़ाई करना चाहता था तो कोई बीसीए करना चाहता था, लेकिन एक केस ने सारी उम्मीदों को तोड़ दिया।
बृजेश का कहना है कि झूठे केस में फंसाने के चलते उनके पूरे परिवार की काफी बेइज्जती हुई है। आर्थिक नुकसान भी बहुत हुआ है। बदनामी के चलते ही उसके भाई ज्ञानी की पत्नी सुमन की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई है। परिवार ने काफी कुछ खो दिया है। इसलिए ये परिवार सविता शर्मा के खिलाफ मानहानि का केस करेगा।