आरटीआई एक्टविस्ट ने सीआईसी रजिस्ट्रार पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
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राजनैतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाने के मामले में सोमवार को केन्द्रीय सूचना आयोग(सीआईसी) में सुनवाई हुई। इस दौरान आरटीआई एक्टिविस्ट ने सीआईसी के रजिस्ट्रार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
सुनवाई में कांग्रेस, एनसीपी,सीपीआई और सीपीएम ने हिस्सा लिया लेकिन भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई से नदारद रहीं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके जैन ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि सीआईसी के रजिस्ट्रार एमके शर्मा ने राजनैतिक पार्टियों को नोटिस भेजने में दोहरा मापदंड अपनाया है। आर के जैन ने कहा कि एमके शर्मा ने कांग्रेस पार्टी को नोटिस सोनिया गांधी के नाम से जारी कर दिया लेकिन बाकी की पांच राष्ट्रीय पार्टियों को उनके अध्यक्ष का नाम लिखे बिना ही नोटिस जारी कर दिया।
सूचना आयुक्त बिमल जुल्का, श्रीधर आर्चार्युलु और सुधीर भार्गव की फुल बेंच के सामने एडीआर के संस्थापक सदस्य जगदीप छोकर ने कहा कि छह राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टियों को आरटीआई को दायरे में लाने का आदेश भले ही तीन साल पहले दिया गया हो लेकिन अब तक ये पार्टियां इस आदेश को नहीं मानती हैं।
सीआईसी को इस ओर कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। वहीं आईसीएचआर के सदस्य वेंकटेश नायक ने कहा कि चूंकि इन पार्टियों को आम आदमी चंदा देता है और एक टैक्स अदा करने वाले आदमी पूरा हक है कि वह जाने कि राजनैतिक पार्टियों में क्या हो रहा है।
उधर, सुभाष अग्रवाल ने पत्र लिखकर कहा कि जब तक 3 जून 2013 का सीआईसी का आदेश नहीं मानती तब तक इनको मिलने वाली छूट, चंदा अन्य सुविधाओं पर तुरंत रोक लगा दी जाए। इस दौरान अपीलार्थी उज्जैन से हर्ष शुक्ला और इलाहाबाद के मलकियत सिंह बाजवा ने भी अपना पक्ष रखा। गौरतलब है कि 3 जून 2013 को सीआईसी ने आदेश दिया था कि छह राजनैतिक पार्टियां आरटीआई के दायरे में आएंगी। लेकिन इसके बाद भी राजनैतिक पार्टियां खुद को पब्लिक अथॉरिटी नहीं मानती हैं।
'एक्यूज' पर हो गई नोकझोक-
सुनवाई के दौरान आरके जैन ने जब सोनिया गांधी को 'एक्यूज' कहा तो तब कांग्रेस के वकील केसी मित्तल ने इस आपत्ति जताई। इस दौरान इस शब्द की तकनीकि परिभाषा को लेकर केसी मित्तल और आरके जैन में तीखी नोकझोक हुई। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु हस्तक्षेप के बाद दोनो शांत हुए।