{"_id":"5ccb2413bdec22074e011e7b","slug":"rs-9590-crore-can-be-recovered-from-amrapali-group","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम्रपाली समूह से वसूले जा सकते हैं 9,590 करोड़ रुपए, निवेशकों से धोखाधड़ी का है मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आम्रपाली समूह से वसूले जा सकते हैं 9,590 करोड़ रुपए, निवेशकों से धोखाधड़ी का है मामला
Fri, 03 May 2019 07:04 AM IST
राजेश सैनी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Fri, 03 May 2019 07:04 AM IST
सार
- फोरेंसिक लेखा परीक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
घर बेचने के नाम पर निवेशकों से धोखाधड़ी करने और 3,523 करोड़ रुपये इधर-उधर करने वाले आम्रपाली समूह से 9,590 करोड़ रुपये की वसूली की जा सकती है। यह जानकारी फोरेंसिक लेखा परीक्षकों ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में दी है।
विज्ञापन
इस मामले में कोर्ट के आदेश से ही पवन अग्रवाल और रवि भाटिया को फोरेंसिक लेखा परीक्षक नियुक्त किया गया था। उन्होंने जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष 8 वॉल्यूम में रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि जो रकम इधर-उधर की गई है, उसमें से 455 करोड़ रुपये फर्म के निदेशकों, उनके परिवार के सदस्यों और प्रबंधकीय पदों पर तैनात व्यक्तियों से, जबकि 321.31 करोड़ रुपये फर्म द्वारा बेचे गए 5,856 फ्लैट की वर्तमान बाजार कीमत के हिसाब से वसूले जा सकते हैं। इसके अलावा 3,487 करोड़ रुपये आम्रपाली समूह के 14 प्रोजेक्ट में फ्लैट का कब्जा लेने वालों से वसूल हो सकते हैं।
विज्ञापन
भाटिया की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक आम्रपाली समूह की कंपनियों ने 234.31 करोड़ रुपये अग्रिम दिए हैं जिनका लेखा-जोखा नहीं है। यह राशि इन कंपनियों के प्रबंधकों से वसूली जा सकती है। अग्रवाल की ओर से ऑडिट रिपोर्ट अभी कोर्ट के समक्ष रखी जानी है। दोनों लेखा परीक्षकों के अनुसार आम्रपाली समूह के 11 अलग-अलग प्रोजेक्ट में 5,229 फ्लैट बिना बिके पड़े हैं, इन्हें बेचने पर 1958.82 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि आम्रपाली समूह पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के 6004.6 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि समूह की कंपनियों ने 1446.68 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट के आधार पर समूह और इसके सहयोगियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
विज्ञापन
आम्रपाली के वकीलों को फीस में मिले फ्लैट और पेंटहाउस
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आम्रपाली समूह के वकीलों को फीस के तौर पर फ्लैट और पेंटहाउस दिए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि यह कानून का उल्लंघन है। फोरेंसिक लेखा परीक्षक अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को खचाखच भरे कोर्ट रूम में किसी वकील का नाम लिए बिना कहा, मैं ऐसे वकीलों से आग्रह करता हूं कि वे ये फ्लैट और पेंटहाउस जल्द से जल्द लौटा दें।चक्कर काटने पड़ते हैं।पिछले साल दिल्ली सरकार से आग्रह किया था कि जिस तरह महिला के लिए कल्याण निगम या बोर्ड बनाए गए हैं, उसी तरह थर्ड जेंडर कल्याण बोर्ड या सोसायटी गठित हो जाए तो हमारी बहुत सी दिक्कतों का समाधान हो सकता है।अधिकांश थर्ड जेंडर अभी भी रेड लाइट पर भीख मांग रहे हैं।जो बाकी बचे हैं वो घरों में बधाई लेने पहुंच जाते हैं।ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कोई थर्ड जेंडर मांग कर खाना चाहता है।हम आगे बढ़ने चाहते हैं, बशर्ते हमें दूसरे वर्गों की तरह अवसर मिलें।