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गुनाहों से बचाने और नेकी कमाने का मौका है रमजान
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 17 Jun 2016 06:40 PM IST
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रमजान
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रमज़ान के मुकद्दस माह में रोजा इंसान को एक अनुभव सिखाता है। रोजा रखने पर इंसान खुदा के आदेश को स्वयं पर लागू करता है। इस बाबत गुलाम अहमद बिसाहड़िया का कहना है कि रमजान एक नेकी कमाने का मौका है।
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जो इंसान को गुनाहों से बचाता है। साथ ही इंसान की सोई हुई रूह को जगाकर खुदा के निकटतम का अनुभव कराता है। रोजा कृतज्ञता को जगाने का माध्यम है जिसके लिए सभी नेक कार्य कर हक हलाल की कमाई करनी चाहिए उसी से बरक्कत होती है।
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हाजी जमील का कहना है कि रमजान के माह में रोजेदारों को बुराई से बचना चाहिए। रोजेदार को अधिक से अधिक समय इबादत में लगाना चाहिए। रमजान इंसान को गुनाह करने से बचाता है और ईमान पर कायम रखने के लिए हिम्मत देता है।
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वहीं रहीसुद्दीन चिश्ती का कहना है कि रमजान का मुबारक महीना गरीब लोगों का विशेष ध्यान रखना सिखाता है। उधर, रबूपुरा में जामा मस्जिद, नाई रंगरेजान, करौलिया मस्जिद आदि में नमाज अदा की गई। जेवर और दनकौर में भी नमाजियों ने अमन और शांति की दुआ मांगी।