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खाली हो गया गुरुकुल, बच्चों को घर ले गए पेरेंट्स, शिक्षा विभाग की टीम को मिले 60 ही बच्चे

Wed, 29 Aug 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 29 Aug 2018 09:43 AM IST
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Rohtak Gurukul case Parents his children Took home After Revealed by Students
फाइल फोटो
गुरुकुल में बच्चों के यौन व शारीरिक उत्पीड़न मामले में मंगलवार को जिला शिक्षा विभाग की एंटी सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्हें यहां महज 60 ही बच्चे मिले। 
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शेष को उनके अभिभावक घर ले गए। इनमें से कितनों को नाम कटवा कर ले जाया गया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल बच्चों को 10 से 15 दिन के लिए घर ले जाने की बात कही जा रही है। इस मामले में कार्रवाई के बाद ही सच सामने आएगा।
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जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रुहिल के निर्देश पर बीईओ वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम गुरुकुल पहुंची। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे गुरुकुल पहुंची टीम ने करीब दो घंटे से अधिक छानबीन की। 
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इससे पूर्व प्रवेश द्वार पर ही टीम के सदस्यों को गुरुकुल के रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ी। इसके बाद ही वे अंदर प्रवेश कर सके। टीम ने यहां बच्चों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें भी यहां बच्चों से गलत काम होने की जानकारी मिली। 

इस गड़बड़ी का टीम को भी संदेह हो गया है। फिलहाल टीम ने कुछ भी कहने से इनकार किया है। टीम की मानें तो उत्पीड़न के शिकार यही छह बच्चे नहीं हैं। ऐसे कुछ और नाम भी सामने आए हैं। 

गुरुकुल के दौरे के दौरान करीब 60 ही विद्यार्थी नजर आए। पूछताछ करने पर पता लगा कि यहां के करीब पौने दो सौ बच्चों में से ज्यादातर अपने घर जा चुके हैं। 

इनमें से कुछ गुरुकुल छोड़कर तो कुछ दस से पंद्रह दिन की छुट्टी पर गए हैं। इनमें से कितने वापस लौटेंगे, यह कहा नहीं जा सकता। फिलहाल अभिभावकों की नजर भी उत्पीड़न के इस मामले की कार्रवाई पर टिकी है।

गुरुकुल में छात्रों के यौन व शारीरिक उत्पीड़न के मामले के बाद हरियाणा प्राईवेट स्कूल संघ ने जिले के सभी स्कूलों व गुरुकुलों में काउंसिलिंग कराने का फैसला लिया है। उत्पीड़न के मामले को गंभीरता से लेते हुए संघ ने यह फैसला लिया है। 

संघ के जिलाध्यक्ष रविंद्र नांदल व अनिल कुंडू ने कहा है कि किसी भी संस्थान की बगैर जांच किए प्रबंधन को सीधे तौर पर दोषी ठहरा कर संस्थानों को बदनाम करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी प्रदेश के कई संस्थानों में घटनाएं हो चुकी हैं। 

जांच में स्कूल प्रबंधन या शिक्षण संस्थान का कोई हाथ नहीं पाया गया। बच्चे का व्यक्तिगत व्यवहार व गलत आचरण कई बार अध्यापकों, अभिभावकों व स्कूल प्रशासन की नजरों में नहीं आता। 

कभी-कभी बच्चे इसे छुपाए रखते हैं। इन्हीं बच्चों के आचरण की वजह से ऐसी गुपचुप हरकतें हो जाती हैं। यह सभी के लिए शर्म की बात है। इसे अभिभावक व समाज स्वीकार नहीं करता है। इसमें शिक्षण संस्थान दोषी नहीं है।
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