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जानें माली के बेटे ने बदला स्टीफेंस का इतिहास

Mon, 25 Aug 2014 05:36 PM IST
Updated Mon, 25 Aug 2014 05:36 PM IST
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Rohit yadav made history and became St. Stephen's president.

दिल्ली में इसे महज एक कॉलेज नहीं बल्कि एक एलीट इंस्टिट्यूशन के तौर पर जाना जाता है। राजधानी के इस संभ्रात वर्गीय कॉलेज में शनिवार को एक नया इतिहास रचा गया।

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दरअसल, दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज को दिल्ली विश्वविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक माना जाता है। सामान्य तौर पर यहां पढ़ने वाले छात्र अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से आते हैं, ऐसी मान्यता है। यही कारण है कि अब तक इस कॉलेज से कोई भी ऐसा छात्र स्टूडेंट यूनियन का प्रेसिडेंट नहीं बन सका जो हिंदी माध्यम स्कूल में पढ़ा लिखा हो।
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लेकिन इस परंपरा को बेहद साधारण परिवार के एक छात्र ने बदल डाला। शनिवार को सेंट स्टीफेंस कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन का इलेक्शन हुआ। इस इलेक्शन में रोहित कुमार यादव ने स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट का चुनाव जीत कर सेंट स्टीफेंस के इतिहास को बदल दिया।
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माली का काम करते थे पिता

Rohit yadav made history and became St. Stephen's president.

दरअसल रोहित इस ‌तथाकथित संभ्रात वर्गीय कॉलेज के ऐसे पहले प्रेसिडेंट हैं जो हिंदी माध्यम से आते हैं और इस ऊंचाई तक पहुंचे हैं। रोहित ने भले ही स्टीफेंस के इतिहास को बदल दिया है लेकिन उनके संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहां से शुरू होती है।

जिस तथाकथित एलीट कॉलेज में रोहित बीए थर्ड इयर के स्टूडेंट थे उसी कॉलेज में उनके पिता माली का काम करते हैं। उत्तर प्रदेश के शहर इलाहाबाद में पले-बढ़े रोहित ने 2012 में दिल्ली में कदम रखा। यह उनकी प्रतिभा का ही कमाल था कि उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन मिला।

शुरू से ही रोहित की दिलचस्पी राजनीति में थी। इसी पैशन ने उन्हें सेंट स्टीफेंस में इलेक्‍शन लड़ने के लिए प्रेरित किया।

एक सपना जो दो साल में ही हुआ पूरा

Rohit yadav made history and became St. Stephen's president.

इंडियन एक्सप्रेस को से बात करते हुए रोहित ने बताया कि राजनीति में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें इलेक्‍शन लड़ने के लिए प्रेरित किया। इसी कॉलेज के जॉर्ज जोसेफ से उन्हें इसकी प्रेरणा मिली। रोहित जब बीए फर्स्ट इयर के स्टूडेंट थे उस वक्त जॉर्ज स्टूडेंट कौंसिल के प्रेसिडेंट थे।

जब रोहित जॉर्ज को ओपेन कोर्ट में बोलते देखते तो उनके मन में भी खयाल आया कि काश एक दिन मैं भी इसी जगह से बोल पाता। रोहित को ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना पड़ा और दो साल बाद ही वह उस जगह खड़े थे जहां से जॉर्ज ने अपनी स्पीच दी थी।

सेंट स्टीफेंस कॉलेज की यह परंपरा रही है कि यहां स्टूडेंट यूनियन में प्रेसिडेंट के पद के सभी उम्मीदवारों को ओपेन कोर्ट में छात्रों को संबोधित करना होता है और उनके सवालों के जवाब देने होते हैं।

उनकी हिंदी ने जीत लिया सबका दिल

Rohit yadav made history and became St. Stephen's president.

ओपेन कोर्ट में जब रोहित खड़े हुए तो देश के इस सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज के हर स्टूडेंट की निगाह उन पर टिकी हुई थी। रोहित के भाषण ने सबका दिल जीत लिया क्योंकि सेंट स्टीफेंस के इ‌तिहास में यह पहला मौका था जब पूरे कॉलेज के सामने किसी ने हिंदी में अपना पूरा भाषण दिया।

इस ओपेन कोर्ट सेशन में कॉलेज के प्रिसिंपल वॉल्‍शन थांपू भी मौजूद थे और रोहित के इस संबोधन ने उनका भी दिल जीत लिया था। रोहित की इस सफलता पर कॉलेज के प्रिंसिपल वॉल्‍शन थांपू ने कहा कि रोहित का जीतना एक महत्वपूर्ण घटना है।

सेंट स्टीफेंस के ‌इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी नॉन टीचिंग स्टाफ का लड़का जिसने अपनी पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल में की हो इतने महत्ववूर्ण पद पर पहुंचा हो।

कॉलेज के प्रिंसिपल का कहना है कि रोहित की इस जीत ने स्टीफेंस के बारे में लोगों की इस मान्यता को तोड़ दिया है कि यह एक एलीट कॉलेज हैं और यहां केवल अमीर और बड़े घरों के बच्चे ही पढ़ते हैं।

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