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Delhi NCR News: रोबोटिक सर्जरी से पैंक्रियाज की दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज
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- वॉल्ड-ऑफ पैंक्रियाटिक नेक्रोसिस से पीड़ित मरीज को मिली नई जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने पैंक्रियाज (अग्न्याशय) की दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रहे 51 वर्षीय मरीज का सफल रोबोटिक सर्जरी के जरिए उपचार किया है। मरीज वॉल्ड-ऑफ पैंक्रियाटिक नेक्रोसिस नामक जटिल बीमारी से पीड़ित था, जो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस की गंभीर अवस्था मानी जाती है। अस्पताल के अनुसार मरीज पिछले दो महीनों से लगातार बुखार, पेट दर्द, भोजन न पचने और तेजी से वजन घटने की समस्या से परेशान था। जांच में पैंक्रियाज के आसपास 6×6 सेंटीमीटर आकार का संक्रमित ऊतक और तरल पदार्थ का जमाव पाया गया। विशेषज्ञों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रोबोट-असिस्टेड पैंक्रियाटिक नेक्रोसेक्टोमी और ड्रेनेज सर्जरी करने का निर्णय लिया। करीब पांच घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया में डॉक्टरों ने लगभग 450 मिलीलीटर संक्रमित तरल पदार्थ और मवाद को बाहर निकाला तथा क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाया। अस्पताल के जीआई सर्जरी, जीआई ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक्स विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉ. नीरज चौधरी ने बताया कि यह बीमारी समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उसे पांच दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने पैंक्रियाज (अग्न्याशय) की दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रहे 51 वर्षीय मरीज का सफल रोबोटिक सर्जरी के जरिए उपचार किया है। मरीज वॉल्ड-ऑफ पैंक्रियाटिक नेक्रोसिस नामक जटिल बीमारी से पीड़ित था, जो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस की गंभीर अवस्था मानी जाती है। अस्पताल के अनुसार मरीज पिछले दो महीनों से लगातार बुखार, पेट दर्द, भोजन न पचने और तेजी से वजन घटने की समस्या से परेशान था। जांच में पैंक्रियाज के आसपास 6×6 सेंटीमीटर आकार का संक्रमित ऊतक और तरल पदार्थ का जमाव पाया गया। विशेषज्ञों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रोबोट-असिस्टेड पैंक्रियाटिक नेक्रोसेक्टोमी और ड्रेनेज सर्जरी करने का निर्णय लिया। करीब पांच घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया में डॉक्टरों ने लगभग 450 मिलीलीटर संक्रमित तरल पदार्थ और मवाद को बाहर निकाला तथा क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाया। अस्पताल के जीआई सर्जरी, जीआई ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक्स विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉ. नीरज चौधरी ने बताया कि यह बीमारी समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उसे पांच दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।