फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Robotic hip replacement surgery reduces complications by up to 40 percent

हिप रिप्लेसमेंट: रोबोटिक सर्जरी से जटिलताएं 40 प्रतिशत तक कम, इम्प्लांट फिटिंग में सात गुना अधिक सटीकता

Sun, 13 Sep 2026 08:04 AM IST
Vijay Singh Pundir सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sun, 13 Sep 2026 08:04 AM IST
सार

सफदरजंग अस्पताल, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल और ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के इस अध्ययन के अनुसार, रोबोटिक-असिस्टेड टोटल हिप आर्थ्रोप्लास्टी (आरटीएचए) में सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

विज्ञापन
Robotic hip replacement surgery reduces complications by up to 40 percent
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

भारत और ब्रिटेन के डॉक्टरों के संयुक्त अध्ययन में रोबोट की मदद से होने वाली हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सटीक और सुरक्षित पाया गया है। 

विज्ञापन


सफदरजंग अस्पताल, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल और ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के इस अध्ययन के अनुसार, रोबोटिक-असिस्टेड टोटल हिप आर्थ्रोप्लास्टी (आरटीएचए) में सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, कृत्रिम जोड़ (इम्प्लांट) की सही स्थिति में फिटिंग की संभावना सात गुना अधिक पाई गई। शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में प्रकाशित 11 बड़ी व्यवस्थित समीक्षाओं और मेटा-विश्लेषणों का विश्लेषण किया। इसमें हजारों मरीजों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया।
विज्ञापन


सफदरजंग अस्पताल के डॉ. मोहित कुमार पत्रलेख के अनुसार, पारंपरिक सर्जरी में डॉक्टर हाथ से संचालित उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इम्प्लांट की स्थिति में मामूली अंतर रह सकता है। इसके विपरीत, रोबोटिक तकनीक में मरीज के थ्रीडी सीटी स्कैन से कूल्हे के जोड़ का डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कूल्हे की गंभीर समस्या वाले मरीजों के लिए उम्मीद
ऑस्टियोआर्थराइटिस, गंभीर कूल्हे के दर्द और जोड़ खराब होने की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, खास शारीरिक जटिलताओं वाले मरीजों में इसके फायदे अधिक हो सकते हैं।


जोड़ खिसकने का खतरा वाले मरीजों के लिए बेहतर विकल्प
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक खासतौर पर मोटापे वाले मरीजों, जन्मजात रूप से कूल्हे की हड्डी में विकृति वाले लोगों और उन मरीजों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जिनमें जोड़ खिसकने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मरीजों में इम्प्लांट की सटीक स्थिति हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed