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खुशखबर: सफदरजंग अस्पताल में अगले माह से रोबोट करेंगे ऑपरेशन
Mon, 24 Dec 2018 02:26 AM IST
vivek shukla
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 24 Dec 2018 02:26 AM IST
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लंबे समय इंतजार के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रोबोट मरीजों के ऑपरेशन करते दिखाई देंगे। सफदरजंग अस्पताल के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि अगले माह जनवरी से रोबोट ऑपरेशन थियेटर में तैनात होगा। अस्पताल सर्जरी करने के लिए18 करोड़ रुपये की लागत वाले एक रोबोट को खरीद रहा है। यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसी माह के अंत तक अस्पताल को रोबोट उपलब्ध भी हो जाएगा।
इसके बाद कुछ टेस्टिंग करने के बाद इसके जरिये ऑपरेशन शुरू होंगे। अस्पताल का ये भी कहना है इस रोबोट से सर्जरी की सुविधा गरीब मरीजों को मुफ्त में दी जाएगी, जबकि प्राइवेट वार्ड लेने वाले मरीजों को इसके लिए कुछ राशि का भुगतान करना होगा। मरीजों के ऑपरेशन इसकी मदद से किए जाएंगे। ये रोबोट यूएस से मंगाया जा रहा है। देश में अभी अपग्रेडेड वर्जन रोबोट दिल्ली एम्स में उपल्बध है।
किडनी प्रत्यारोपण भी
इस रोबोट से किडनी प्रत्यारोपण और दूसरी कई सर्जरी की जा सकेंगी। यूरोलॉजी से जुड़ी ऑपरेशन भी किया जा सकेगा। डॉ. अनूप ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में किडनी और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए 4-5 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि इस रोबोट से बहुत कम खर्चे में हो सकेंगी। डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि अभी तक अस्पताल में 3डी लेप्रोस्कोपी तकनीक के चलते यूरोलॉजी से जुड़े मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं।
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इसके बाद कुछ टेस्टिंग करने के बाद इसके जरिये ऑपरेशन शुरू होंगे। अस्पताल का ये भी कहना है इस रोबोट से सर्जरी की सुविधा गरीब मरीजों को मुफ्त में दी जाएगी, जबकि प्राइवेट वार्ड लेने वाले मरीजों को इसके लिए कुछ राशि का भुगतान करना होगा। मरीजों के ऑपरेशन इसकी मदद से किए जाएंगे। ये रोबोट यूएस से मंगाया जा रहा है। देश में अभी अपग्रेडेड वर्जन रोबोट दिल्ली एम्स में उपल्बध है।
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किडनी प्रत्यारोपण भी
इस रोबोट से किडनी प्रत्यारोपण और दूसरी कई सर्जरी की जा सकेंगी। यूरोलॉजी से जुड़ी ऑपरेशन भी किया जा सकेगा। डॉ. अनूप ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में किडनी और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए 4-5 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि इस रोबोट से बहुत कम खर्चे में हो सकेंगी। डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि अभी तक अस्पताल में 3डी लेप्रोस्कोपी तकनीक के चलते यूरोलॉजी से जुड़े मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं।
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ज्यादा चीर फाड़ की जरूरत नहीं
डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि रोबोट के जरिये मरीज के शरीर में तीन पंक्चर लगाकर ही काम चल सकेगा। ज्यादा चीर फाड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी। तीन में से एक छेद के जरिये 3डी कैमरा शरीर में जाएगा, जबकि अन्य दो छेदों के जरिये ऑपरेशन के उपकरण जा सकेंगे।
इससे न सिर्फ ऑपरेशन में ज्यादा वक्त लगेगा, बल्कि मरीज को चीर फाड़ से आराम होगा। उनकी रिकवरी जल्दी हो सकेगी। साथ ही मरीज के अस्पताल में रहने के समय में भी कमी देखने को मिलेगी।
रोबोट की पूरी तकनीक कंप्यूटर आधारित होगी। शरीर के अंदर कैमरा जाने के बाद बाहर डिस्प्ले पर लाइव तस्वीरें देखने को मिलेंगी, जिनके जरिये सर्जन ऑपरेशन कर सकेंगे।
इससे न सिर्फ ऑपरेशन में ज्यादा वक्त लगेगा, बल्कि मरीज को चीर फाड़ से आराम होगा। उनकी रिकवरी जल्दी हो सकेगी। साथ ही मरीज के अस्पताल में रहने के समय में भी कमी देखने को मिलेगी।
रोबोट की पूरी तकनीक कंप्यूटर आधारित होगी। शरीर के अंदर कैमरा जाने के बाद बाहर डिस्प्ले पर लाइव तस्वीरें देखने को मिलेंगी, जिनके जरिये सर्जन ऑपरेशन कर सकेंगे।