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रितु माहेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: सीजेआई ने कहा- सभी नियम कानून पता हैं, कोर्ट के आदेशों का सम्मान नहीं करतीं

Mon, 09 May 2022 03:09 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 09 May 2022 03:09 PM IST
सार

नोएडा सीईओ को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। हाईकोर्ट का आदेश न मानने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अथॉरिटी की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना क्यों?
 

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Ritu Maheshwari reprimanded by Supreme Court CJI said you do not respect orders of court
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

नोएडा सीईओ रितु माहेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगी है। हाईकोर्ट का आदेश न मानने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अथॉरिटी की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना क्यों?

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न्यायालय ने रितु माहेश्वरी को फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि आप आईएएस हैं। आपको सभी नियम कानून पता हैं। सीजेआई ने कहा कि आप कोर्ट के आदेशों का सम्मान नहीं करतीं।

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हाईकोर्ट ने जारी किया है रितु माहेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) गौतमबुद्धनगर की मुख्य कार्यकारी अधिकार (सीईओ) ऋतु माहेश्वरी के समय पर कोर्ट में उपस्थित न होने पर नाराजगी जताई।

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कोर्ट ने सीईओ के कृत्य को निदंनीय बताते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है, साथ ही उन्हें पुलिस हिरासत में पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने श्रीमती मनोरमा कुछाल व अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने नोएडा में भूमि अधिग्रहण मामले में सीईओ को 28 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वह केस की सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हो सकीं। सीईओ के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि वह फ्लाइट से 10.30 बजे प्रयागराज के लिए रवाना हुई हैं। इसलिए मामले की सुनवाई उनके कोर्ट पहुंचने तक टाल दी जाए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट का कहना था कि कोर्ट का कामकाज शुरू होने के बाद उड़ान भरना, उम्मीद करना कि कोर्ट उनका इंतजार करेगी और अदालत पहुंचने के बाद मामले को उठाएगी, सीईओ का यह आचरण निंदनीय है और न्यायालयों की अवमानना के समान है।

हाईकोर्ट का कहना था कि उन्हें कोर्ट द्वारा पारित आदेश का पालन न करने के लिए अवमानना कार्यवाही में तलब किया गया है। उन्हें कोर्ट में 10 बजे उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर देरी की। यह कृत्य कोर्ट का अनादर करने के बराबर है।

कोर्ट ने सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए रजिस्ट्रार को आदेश की प्रति सीजीएम गौतमबुद्धनगर को 48 घंटे में मुहैया कराने को कहा है। आदेश दिया है कि गौतमबुद्धनगर की सीईओ को पुलिस हिरासत में कोर्ट के सामने पेश किया जाए।

ये है मामला

नोएडा के सेक्टर 82 में अथॉरिटी ने 30 नवंबर 1989 और 16 जून 1990 को अर्जेंसी क्लॉज के तहत भूमि अधिग्रहण किया गया था, जिसे जमीन की मालकिन मनोरमा कुच्छल ने चुनौती दी थी। वर्ष 1990 में मनोरमा की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2016 को फैसला सुनाया था।

हाईकोर्ट ने अर्जेंसी क्लॉज के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। मनोरमा कुच्छल को नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सर्किल रेट से दोगुनी दरों पर मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके अलावा प्रत्येक याचिका पर पांच-पांच लाख रुपये के खर्च का भुगतान करने का आदेश प्राधिकरण को दिया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट में अथॉरिटी मुकदमा हार गई। इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इस पर अवमानना याचिका दाखिल हुई थी।

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