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अब प्लेटफार्म पर खानपान का सामान बेचने वालों को उठाना पड़ेगा नोटबंदी का खामियाजा
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:05 AM IST
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- फोटो : लाल सिंह/अमर उजाला
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नोटबंदी का खामियाजा अब प्लेटफार्म पर खानपान के स्टॉल और ट्रॉली वालों को भी उठाना पड़ सकता है। लाइसेंसी ठेकेदारों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि उन्हें महज एक सप्ताह में लाखों रुपये लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए फीस कैश जमा करानी है। भारतीय रेलवे खानपान वेलफेयर एसोसिएशन ने इसपर आपत्ति उठाई है।
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अखिल भारतीय रेलवे खानपान वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता का कहना है कि यह राशि एक लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक है। रेलवे ने समय पर इसकी जानकारी नहीं दी। रेलवे पुराने नोट स्वीकार नहीं कर रहा है और चेक लेने को तैयार नहीं है।
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उन्होंने कहा कि उत्तर रेलवे ने अपने सभी मंडलों को बीते 13 जुलाई को ही लेटर भेजकर अगले 6 महीने का लाइसेंस फीस ठेकेदारों से लेने का आदेश दिया लेकिन दिल्ली मंडल के अधिकारियों ने इसे चार महीने तक दबा के रखा। अगर यह आदेश नोटबंदी के पहले आ जाता तो समस्या नहीं होती।
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समय पर अगर फीस जमा नहीं की गई तो ट्रॉली सील करने का प्रावधान है। इससे रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। दिल्ली रेल मंडल प्रबंधक अरुण अरोरा का कहना है कि कैश में पैसा वेंडरों से इसलिए लिया जाता है कि क्योंकि चेक बाउंस होने का खतरा रहता है। ठेकेदार डिमांड ड्राफ्ट जमा करा सकते हैं।