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Delhi NCR News: अंकित शर्मा मर्डर केस में ताहिर हुसैन की उम्रकैद की सजा के खिलाफ याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) काउंसलर ताहिर हुसैन की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने हुसैन की अपील पर पुलिस को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को अन्य दोषियों की अपीलों के साथ की जाएगी। अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को लापता हो गए थे, जब दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में थी। उनके पिता रविंदर कुमार ने अगले दिन प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि तब के काउंसलर ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और फायरिंग की थी। बाद में अंकित शर्मा का शव नाले से बरामद हुआ था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों नजीर, आसिम, जावेद और अनस को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। उन्हें आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 188, 153ए, 147, 148, 149 और 365 के तहत दोषी पाया गया था। 31 जुलाई को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली पुलिस ने इनके लिए मौत की सजा की मांग की थी।
अपनी अपील में ताहिर हुसैन ने आरोप लगाया कि शुरू से ही जांच पक्षपातपूर्ण रही और उन्हें जनता के गुस्से को शांत करने के लिए फंसाया गया। हुसैन ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश, उकसावे आदि से बरी किया, लेकिन धारा 149 के आधार पर अवैध जमावड़े का सदस्य बताकर दोषी ठहराया। उन्होंने अभियोजन के पांच गवाहों और दो भाईयों के बयानों को भी चुनौती दी है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) काउंसलर ताहिर हुसैन की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने हुसैन की अपील पर पुलिस को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को अन्य दोषियों की अपीलों के साथ की जाएगी। अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को लापता हो गए थे, जब दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में थी। उनके पिता रविंदर कुमार ने अगले दिन प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि तब के काउंसलर ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और फायरिंग की थी। बाद में अंकित शर्मा का शव नाले से बरामद हुआ था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों नजीर, आसिम, जावेद और अनस को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। उन्हें आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 188, 153ए, 147, 148, 149 और 365 के तहत दोषी पाया गया था। 31 जुलाई को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली पुलिस ने इनके लिए मौत की सजा की मांग की थी।
अपनी अपील में ताहिर हुसैन ने आरोप लगाया कि शुरू से ही जांच पक्षपातपूर्ण रही और उन्हें जनता के गुस्से को शांत करने के लिए फंसाया गया। हुसैन ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश, उकसावे आदि से बरी किया, लेकिन धारा 149 के आधार पर अवैध जमावड़े का सदस्य बताकर दोषी ठहराया। उन्होंने अभियोजन के पांच गवाहों और दो भाईयों के बयानों को भी चुनौती दी है।
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