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Delhi NCR News: फीस बढ़ोतरी का रेजिडेंट डॉक्टरों ने किया विरोध
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) और गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबीएच) में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाए जाने का रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने भी डॉक्टरों की मांगों का समर्थन किया है।
नई फीस व्यवस्था के तहत पीजी के पहले वर्ष की फीस 87,220 रुपये, दूसरे वर्ष की 79,320 रुपये और तीसरे वर्ष की 85,920 रुपये तय की गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि नई फीस पिछले बैचों की तुलना में करीब दोगुनी है। उनका यह भी कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पीजी की फीस इससे काफी कम है।
डॉक्टरों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में वे दिन-रात मरीजों के इलाज और देखभाल में जुटे रहते हैं। ऐसे में अचानक फीस बढ़ने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। फेमा ने एक ही विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेजों में फीस के अंतर को अनुचित बताते हुए बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग की है।
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संगठन ने फीस बढ़ोतरी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने, अन्य मेडिकल कॉलेजों के समान फीस तय करने, अधिक वसूली गई राशि लौटाने और रेजिडेंट डॉक्टरों से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
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पूर्वी दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) और गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबीएच) में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाए जाने का रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने भी डॉक्टरों की मांगों का समर्थन किया है।
नई फीस व्यवस्था के तहत पीजी के पहले वर्ष की फीस 87,220 रुपये, दूसरे वर्ष की 79,320 रुपये और तीसरे वर्ष की 85,920 रुपये तय की गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि नई फीस पिछले बैचों की तुलना में करीब दोगुनी है। उनका यह भी कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पीजी की फीस इससे काफी कम है।
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डॉक्टरों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में वे दिन-रात मरीजों के इलाज और देखभाल में जुटे रहते हैं। ऐसे में अचानक फीस बढ़ने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। फेमा ने एक ही विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेजों में फीस के अंतर को अनुचित बताते हुए बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग की है।
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संगठन ने फीस बढ़ोतरी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने, अन्य मेडिकल कॉलेजों के समान फीस तय करने, अधिक वसूली गई राशि लौटाने और रेजिडेंट डॉक्टरों से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।