यमुना में बाढ़ से निपटने को तैयार है रेस्क्यू टीम, 24 नावों को गोताखोरों के साथ इमरजेंसी ड्यूटी पर लगाया
- बाढ़ एवं सिंचाई विभाग और पूर्वी दिल्ली जिला टीम को लेकर 56 नावें उपलब्ध
- बाढ़ एवं सिंचाई विभाग, एमसीडी और स्वास्थ्य अधिकारियों की लगातार हो रही बैठक
- हथिनी कुंड बैराज से और ज्यादा पानी छोड़े जाने की आशंका से अलर्ट है प्रशासन
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हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी में जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। अभी यह चेतावनी स्तर से नीचे है, लेकिन बाढ़ की किसी संभावना से निबटने के लिए बाढ़ एवं सिंचाई विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। यमुना के विभिन्न घाटों पर 24 नावों को इमरजेंसी ड्यूटी पर लगा दिया गया है।
सभी नावों पर दो-दो गोताखोरों को भी लगाया गया है। हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यमुना का जलस्तर 204.38 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी स्तर 204.50 मीटर के बेहद करीब है।
बाढ़ एवं सिंचाई विभाग में इंचार्ज हरीश ने अमर उजाला को बताया कि उनके पास 40 नावों का बेड़ा तैयार स्थिति में है, जो किसी भी समय लोगों की मदद के लिए बाढ़ क्षेत्र में कहीं भी पहुंचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पूर्वी जिले की टीम के पास 14 अतिरिक्त नावें हैं, जिनकी जरूरत पड़ने पर सहायता ली जाती है।
उन्होंने बताया कि अलीपुर से लेकर जैतपुर के घाटों के आसपास 24 नावों की तैनाती अभी से कर दी गई है। किसी जगह से बचाव से संबंधित कोई कॉल आने पर नजदीकी टीम को तत्काल रेस्क्यू के लिए भेज दिया जाता है।
अन्य विभागों से भी संपर्क
जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के साथ एमसीडी और स्वास्थ्य विभाग भी मिलकर काम करते हैं। किसी क्षेत्र में बाढ़ आने की स्थिति में जलभराव हो जाता है और वहां मच्छरजनित बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि इन इलाकों में साथ-साथ मलेरियारोधी दवाओं का छिड़काव भी किया जाता है। इन चीजों को ध्यान में रखते हुए अभी से सभी संबंधित विभागों में समन्वय बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है।
क्या है चेतावनी और खतरे का स्तर
यमुना के पुराने पुल के पास अंकित चिन्ह से दिल्ली में यमुना के जल स्तर को मापा जाता है। यहां 204.50 मीटर को चेतावनी का स्तर अंकित किया गया है, जबकि 205.33 मीटर को खतरनाक स्तर माना जाता है।
हालांकि, गत वर्ष का अनुभव बताता है कि इस स्तर पर पानी आ जाने के बाद भी ज्यादा क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव नहीं होता है। 2018 में पानी का स्तर 205.50 मीटर तक पहुंच गया था, लेकिन इसकी वजह से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।