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गणतंत्र दिवस विशेष: ये भी हैं लोकतंत्र के सजग प्रहरी

Thu, 26 Jan 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 26 Jan 2017 12:19 AM IST
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repulic day special : these are real guards of republic
- फोटो : अमर उजाला

देश आज अपना 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की आजादी के लिए न जाने कितनों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्हें आज हम श्रद्धा से नमन करते हैं। आजादी हासिल करना जितनी कठिन चुनौती थी उससे कम चुनौती लोकतंत्र को सहेजने की भी नहीं है। जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा और वर्ग से ऊपर उठकर देश और समाज के बारे में सोचने और सेवा करने वाले सच्चे अर्थों में लोकतंत्र के सजग प्रहरी है। 

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गरीब बच्चों की हक की लड़ाई
गरीब बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। वे भी अमीर बच्चों की भांति अच्छे व स्वच्छ स्कूल में पढ़ सकें। इसके लिए अक्सर ‘मिशन तालीम’ के कार्यकर्ता प्रशासनिक अधिकारियों से उलझते दिखाई देते हैं। संगठन ने ईडब्ल्यूएस व बीपीएल परिवार के बच्चों के लिए विशेष कैंप लगाए। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक इकरामुल हक कहते हैं कि हमारा भारत विकास की बुलंदियों को छू रहा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। लेकिन आज भी ऐसा वंचित समाज है, जिसके पास ज्ञान की रोशनी नहीं पहुंची है। उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ने का माध्यम शिक्षा है। मिशन तालीम जाति, धर्म से ऊपर उठकर ऐसे वंचित व गरीब बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित कराने का काम कर रहा है। 
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बदल दी गांव की तस्वीर 
पृथला खंड के गांव गढ़खेड़ा में सशक्त युवा फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने अपने गांव की तस्वीर बदल दी है। पिछले साल प्रदेश में हुए जाट आंदोलन के बाद गांव में फैले जाति विद्वेष को खत्म करने के लिए गांव के युवा हरीदत्त, कमल दीक्षित, जीतपाल सांगवान, नेत्रपाल, चमन वैष्णव, मुकेश, ओमपाल शास्त्री, उदयपाल प्रजापति ने गांव के विद्वेष को खत्म कर विकास के रास्ते पर लाने की कोशिश की। एक साल के अंतराल में गांव पुन: विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। इन युवाओं के बूते गांव में वाचनालय, सिलाई सेंटर, बुजुर्गों को शिक्षित करने और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम होते हैं। गांव में 16 जातियों की कुल आबादी 4821 है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम भी यहां जमीनी स्तर पर दिखता है। इन युवाओं की चाहत मुख्यमंत्री से मिलकर गांव को मॉडल गांव बनाने के साथ गांव को स्वच्छता के साथ शैक्षिक, तकनीकी और विज्ञान की दिशा में आगे ले जाने की है। 
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सेवा की अनूठी मिसाल बंसीलाल 
तिरखा कॉलोनी स्थित दोन्यी पोलो छात्रावास की देखरेख करने वाले बंसीलाल कत्याल का 80 वर्ष की आयुु पूरी करने के बाद भी समाज सेवा के प्रति जुनून कम नहीं हुआ है। हजारों किलोमीटर दूर आदिवासी, वनवासी अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा में रहने वाले सैंकड़ों बच्चों को बंसीलाल कत्याल ने शहर में ठिकाना देकर शिक्षा दी। अनजान बच्चों से पिता तुल्य प्रेम करते हुए बंसीलाल की अध्यक्षता में चल रहे छात्रावास में फिलहाल 13 बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां इन आदिवासी बच्चों को ऐसी दिशा मिली कि अब वे 10वीं व 12वीं नहीं, बल्कि एमबीए और आईएएस परीक्षाओं की तैयारियां में जुट गए हैं। बंसीलाल कहते हैं इन बच्चों का रहन-सहन और खाना हमारे यहां से एकदम अलग है। लेकिन छात्रावास के माहौल में ढलकर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। 


स्लम बस्तियों के स्वच्छता दूत
इंद्रा नगर, एसी नगर जैसी स्लम बस्तियों को स्वच्छ बनाने में जुटे कर्नल समर सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्हें अब इन कॉलोनियों में ‘स्वच्छता दूत’ कहा जाने लगा है। सामाजिक समरसता मंच के बतौर अध्यक्ष कर्नल समर सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होकर दिन-रात गंदी बस्तियों को कैसे स्वच्छ किया जाए, इसी प्रयास में लगे रहते हैं। लोगों को खुले में शौच करने से रोकने से लेकर हर घर शौचालय बनवाने में कर्नल समर सिंह अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे कहते हैं कि स्लम बस्तियां अभी तक सिर्फ वोट खरीदने-बेचने का स्थान मानी जाती रही हैं। मंच के कार्यकर्ता इन बस्तियों में वहां के लोगों को उनके अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जानकारी देते हैं। जब लोगों को सुविधाएं मिलेंगी तो वे भी मुख्यधारा में आएंगे। शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कत आई लेकिन बाद में टीम बनने के बाद योजनाएं घरातल पर दिखाई देने लगी हैं।

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