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शोध में खुलासा: महिलाओं में तीसरा बड़ा कैंसर है ओवेरियन, लिम्फ नोड्स न निकलने पर बढ़ती है समस्या; जानें
Tue, 15 Apr 2025 07:54 AM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 15 Apr 2025 07:54 AM IST
सार
एम्स के शोध में एक खुलासा हुआ है। जिसमें बताया है कि महिलाओं में सबसे खतरनाक बीमारी ओवेरियन कैंसर है। ओवेरियन कैंसर में लिम्फ नोड्स निकालने पर जिंदगी के पल बढ़ सकते हैं। लेकिन वहीं सर्जरी कर लिम्फ नोड्स न निकलने पर समस्या बढ़ती है। मरीज दम तोड़ देता है।
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डॉक्टर और मरीज
- फोटो : Freepik
विस्तार
ओवेरियन कैंसर से पीड़ित महिला की सही ढंग से सर्जरी कर लिम्फ नोड्स निकालने पर जिंदगी के कुछ पल बढ़ सकते हैं। यह खुलासा एम्स के एक शोध से हुआ है। इसमें पाया गया कि यदि सर्जन सही समय पर सर्जरी कर उक्त लिम्फ नोड्स को हटा देता है तो मरीज की जिंदगी पांच साल तक बढ़ सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर के बाद महिलाओं में होने वाला तीसरा बड़ा कैंसर ओवेरियन है। इसमें कैंसर अंडाशय से शुरू होकर धीरे-धीरे पेट के अंदर के हिस्सों में फैल जाता है। एडवांस स्टेज के मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है और महिला दम तोड़ देती है। इस समस्या से निपटने के लिए एम्स के विशेषज्ञों ने 105 मरीजों पर एक शोध किया। मौजूदा समय में शाेध में शामिल मरीजों की संख्या बढ़कर 600 पहुंच गई है।
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इस शोध में पाया गया कि यदि सर्जरी कर प्रभावित हिस्से के साथ लिम्फ नोड्स को निकाल दिया जाए तो मरीज की जिंदगी के कुछ पल को बढ़ाया जा सकता है। लिम्फ नोड्स शरीर का मुख्य अंग हैं। इसके आसपास महत्वपूर्ण धमनियां व दूसरे अंग होते हैं। यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण है। मौजूदा समय में डॉक्टर इसे करने से बचते हैं, लेकिन शोध बताता है कि डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दे तो यह सर्जरी करना संभव हो सकेगा।
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शोध में परिणाम मिले बेहतर
एम्स के कैंसर विभाग के प्रोफेसर डॉ. (मेजर) मुकुरदीपी रे (एमडी रे) ने बताया कि शोध में 105 मरीजों को शामिल किया, जिन्होंने सीआरएस करवाया था। एडवांस ओवेरियन कैंसर में नोडल सकारात्मकता हिस्टोपैथोलॉजिकल रूप से करीब 68-70 फीसदी है। नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के बाद भी नोडल सकारात्मकता की आशंका करीब 50-80 फीसदी है। ऐसे में नोडल बोझ सीआरएस के दौरान मूल्यांकन और दस्तावेजीकरण और पूर्ण निकासी से सुधार बेहतर है।
शोध में पेट को 13 हिस्सों में बांटा
शोध में शामिल हुई महिलाओं के रेट्रो-एरिटोनियल लिम्फ नोड्स और द्विपक्षीय पेल्विक लिम्फ नोड को सर्जरी कर हटाया गया। नोडल कैंसर इंडेक्स की गणना के लिए, पेट को 13 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इसमें रेट्रोपेरिटोनियम के लिए क्षेत्र 1-6, पेल्विक नोड्स के लिए क्षेत्र 1-6 और अतिरिक्त-पेट के नोड्स के लिए क्षेत्र 0 शामिल हैं। इसके अलावा, 1 से 3 तक का नोडल आकार स्कोर प्रस्तावित किया गया है ताकि नोडल कैंसर इंडेक्स 13 से 39 तक हो।
रोगियों की औसत आयु 51 रही
शोध में शामिल हुए रोगियों की औसत आयु 51 साल (सीमा 19-71) थी। इसमें इसमें स्टेज 3 में 65.7 फीसदी रोगी थे। जबकि 34.3 फीसदी मरीज स्टेज 4 में थे। जांच के दौरान 62 रोगियों (59 फीसदी) में लिम्फ नोड्स सकारात्मक पाए गए। एनएसीटी प्राप्त करने वालों में 26 (41.9 फीसदी) की तुलना में अग्रिम सर्जरी कराने वाले रोगियों में सकारात्मकता दर अधिक थी। अधिकांश रोगियों (56.6 फीसदी) में पेल्विक और रेट्रोपेरिटोनियल दोनों समूहों में सकारात्मक लिम्फ नोड्स थे, जबकि 19.3 फीसदी में केवल पेल्विक नोड्स सकारात्मक थे। 24.2 फीसदी में केवल रेट्रोपेरिटोनियल नोड्स सकारात्मक थे। सर्जरी के बाद मरीज की जीवित रहने की संभावना को पांच साल तक बढ़ाया जा सका।