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Delhi NCR News: सीवर कार्यों में होगा रीसाइकिल्ड कंक्रीट और एम-सैंड का इस्तेमाल
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पूर्वी दिल्ली में पर्यावरण अनुकूल तकनीक को मिलेगी प्राथमिकता
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। यमुनापार में निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले मलबे (सीएंडडी वेस्ट) के निपटान और सड़कों पर उड़ती धूल से पैदा होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। गांधी नगर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्रों के वार्डों में सीवर लाइनों के सुदृढ़ीकरण, पाइप बदलने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कामों में कम से कम 10 प्रतिशत रीसाइकिल्ड उत्पादों का उपयोग किया जाएगा।
पूर्वी दिल्ली में रोजाना हजारों टन निर्माण मलबा निकलता है, जो अक्सर सड़कों के किनारे या खाली प्लॉटों में डंप कर दिया जाता है। हवा चलने पर उठने वाली महीन धूल वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती है। नए फैसले के तहत सड़कों की मरम्मत, पीसीसी और सीवर लाइनों के आसपास के निर्माण में मलबे से तैयार एम-सैंड, रीसाइकिल्ड एग्रीगेट, कंक्रीट ब्लॉक्स और पेवर टाइल्स का इस्तेमाल होगा।
इस योजना से गांधी नगर, ओल्ड व न्यू सीलमपुर, शांति मोहल्ला, रघुबर पुरा, कांति नगर और कांति नगर एक्सटेंशन के लगभग तीन से चार लाख निवासियों को सीवर भराव और बदबू से राहत मिलेगी। वार्ड 213 में मुख्य सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग और पुरानी पाइपलाइनों को बदलकर नया नेटवर्क बिछाया जाएगा। शांति मोहल्ला व रघुबर पुरा की गलियों के नालों को दुरुस्त किया जाएगा। कांति नगर व एक्सटेंशन में सीवर क्षमता बढ़ाई जाएगी और उखाड़ी गई सड़कों को सही किया जाएगा। इन सभी निर्माण में रीसाइकिल्ड उत्पादों का उपयोग किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। यमुनापार में निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले मलबे (सीएंडडी वेस्ट) के निपटान और सड़कों पर उड़ती धूल से पैदा होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। गांधी नगर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्रों के वार्डों में सीवर लाइनों के सुदृढ़ीकरण, पाइप बदलने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कामों में कम से कम 10 प्रतिशत रीसाइकिल्ड उत्पादों का उपयोग किया जाएगा।
पूर्वी दिल्ली में रोजाना हजारों टन निर्माण मलबा निकलता है, जो अक्सर सड़कों के किनारे या खाली प्लॉटों में डंप कर दिया जाता है। हवा चलने पर उठने वाली महीन धूल वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती है। नए फैसले के तहत सड़कों की मरम्मत, पीसीसी और सीवर लाइनों के आसपास के निर्माण में मलबे से तैयार एम-सैंड, रीसाइकिल्ड एग्रीगेट, कंक्रीट ब्लॉक्स और पेवर टाइल्स का इस्तेमाल होगा।
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इस योजना से गांधी नगर, ओल्ड व न्यू सीलमपुर, शांति मोहल्ला, रघुबर पुरा, कांति नगर और कांति नगर एक्सटेंशन के लगभग तीन से चार लाख निवासियों को सीवर भराव और बदबू से राहत मिलेगी। वार्ड 213 में मुख्य सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग और पुरानी पाइपलाइनों को बदलकर नया नेटवर्क बिछाया जाएगा। शांति मोहल्ला व रघुबर पुरा की गलियों के नालों को दुरुस्त किया जाएगा। कांति नगर व एक्सटेंशन में सीवर क्षमता बढ़ाई जाएगी और उखाड़ी गई सड़कों को सही किया जाएगा। इन सभी निर्माण में रीसाइकिल्ड उत्पादों का उपयोग किया जाएगा।
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