जानिए क्यों शाम 4 बजे के बजाए रात 8 बजे ही कोर्ट ने सुनाया हनीप्रीत की जमानत पर फैसला
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मंगलवार को देश भर की निगाह दिल्ली हाईकोर्ट पर थी। सब ये जानना चाहते थे कि आखिर हनीप्रीत को जमानत मिलेगी या नहीं लेकिन शायद इस मामले पर फैसला देना कोर्ट के लिए भी उतना आसान नहीं था।
कोर्ट में बहस तो तीन बजे से पहले ही पूरी हो गई लेकिन जज ने अपना फैसला सुनाने के लिए पांच घंटे से भी ज्यादा का समय लिया ताकि इस संवेदनशील मामले में कोई भी कानून पक्ष अनदेखा न रहा जाए।
रात आठ बजे जब अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाना शुरू किया तो कोर्ट ने ये स्पष्ट करने में ही काफी वक्त लगाया कि आखिर अग्रिम जमानत कैसे और किन मामलों में दी जा सकती है।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने दी ये दलील
गंभीर मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान करना पुलिस की जांच में घुसपैठ है। इसलिये आरोपी को अग्रिम जमानत केवल विशेष हालात में ही दी जानी चाहिये। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की है।
जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने हनीप्रीत की याचिका खारिज करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत पुलिस जांच के दायरे में घुसपैठ है। आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान करने के लिए बेहद विकट हालात होने चाहिए। इसलिए अग्रिम जमानत प्रदान करते समय कोर्ट को बेहद सतर्क होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा अग्रिम जमानत प्रदान करना अदालत के स्वविवेक पर निर्भर करता है। इस अधिकार का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए और कोर्ट को इस बात से खुद को संतुष्ट करना चाहिये कि जमानत याचिका विश्वसनीय कारणों पर आधारित है और जानबूझकर कोर्ट का क्षेत्राधिकार बनाने के इरादे से तथ्यों को तोड़ा मोड़ा नहीं गया है।
हनीप्रीत के खिलाफ देशद्रोह व आपराधिक साजिश का है आरोप
अदालत ने कहा कि जब भी ऐसे किसी मामले में अग्रिम जमानत मांगी जाती है, जिसकी एफआईआर कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर दर्ज की गई तो यह देखना कोर्ट की जिम्मेदारी है कि याची उसके क्षेत्राधिकार स्थित स्थान पर नियमित रूप से रहता है और वह केवल गिरफ्तारी से बचने के लिये झूठा क्षेत्राधिकार नहीं बना रहा है।
अगर अदालत इस पहलू पर संतुष्ट नहीं तो ऐसा याचिका को खारिज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मौजूदा केस का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में हनीप्रीत के खिलाफ देशद्रोह व आपराधिक साजिश का केस पंचकूला सेक्टर पांच थाने में दर्ज किया गया है।
याची की गिरफ्तारी के लिये लुक आउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इससे साफ है कि याची लगातार गिरफ्तार से बचने की कोशिश कर रही है और जांच में शामिल नहीं हो रही है। दूसरी ओर पुलिस की कोशिश उसे हर हाल में गिरफ्तार करने की है। उसका नाम फोटो सहित वांटेड अपराधियों की सूची में 20 सितंबर को शामिल किया जा चुका है।
अदालत ने दूसरी ओर याची के वकील प्रदीप आर्य ने पुलिस के सामने सरेंडर या जांच में शामिल होने के सवाल पर सहमति जाहिर नहीं की है। ऐसे हालात में हनीप्रीत को अग्रिम जमानत प्रदान नहीं की जा सकती।