पढ़िए जेटली के आम बजट से दिल्ली के हिस्से में क्या आया?
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दिल्ली सरकार को केंद्रीय बजट में न तो कोई नया पैकेज मिला और न ही केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ी। सामान्य केंद्रीय सहायता में पिछले वर्ष के मुकाबले मामूली वृद्धि जरूर हुई, लेकिन जो कुछ आम आदमी पार्टी सरकार ने मांगा था, वो नहीं मिला।
सभी मदों में वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए कुल 756 करोड़ की राशि दी गई है। इसमें 325 करोड़ केंद्रीय करों में भागीदारी, पांच करोड़ आपदा प्रबंधन, 413 करोड़ केंद्रीय सहायता व पंद्रह करोड़ सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजे के रूप में मिले हैं।
वित्त विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली की पौने दो करोड़ की आबादी तमाम टैक्स देती है। ऐसे में फिर से दिल्ली वालों के साथ वित्तीय धोखा हुआ है।
आपदा प्रबंधन के लिए सिर्फ 5 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है
वित्तमंत्री ने कहा है कि 2001-02 में दिल्ली का बजट 8739 करोड़ रुपये था तब भी करों में भागीदारी 325 करोड़ रुपये थी और अब बजट 41,129 करोड़ रुपये का हो गया है तब भी वही हिस्सेदारी मिल रही है।
दिल्ली सरकार ने इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात भी की, प्री बजट कंसल्टेशन में भी मांग रखी लेकिन वृद्धि नहीं की गई।
उप मुख्यमंत्री ने कहा दिल्ली भूकंप के हिसाब से सिस्मिक जोन-4 में है लेकिन आपदा प्रबंधन के लिए सिर्फ 5 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है।
निगम की हालत सुधारने के लिए नहीं मिला फंड
जबकि हरियाणा, पंजाब के लिए बड़ी राशि दी गई है। वहीं, योजनाबद्ध का बजट 15 साल में 3129 करोड़ रुपये से 19 हजार करोड़ रुपये हो गया लेकिन सामान्य केंद्रीय सहायता राशि 370 करोड़ रुपये से इतने साल में बढ़कर सिर्फ 412.99 करोड़ रुपये हुई है। पिछले वर्ष के मुकाबले में 4.6 फीसदी बढ़ा है।
सिसोदिया ने कहा, दिल्ली में नगर निगम की हालत खराब है लेकिन सुधार का कोई फंड नहीं दिया गया। जबकि हरियाणा, पंजाब व राजस्थान को मोटी रकम दी गई।
प्रदूषण कम करने व पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए 4 हजार करोड़ रुपये मांगे थे, वो भी नहीं मिला। डीजल वाहनों पर सेस बढ़ाकर दिल्ली की मांग मानने के लिए सिसोदिया ने केंद्र का धन्यवाद किया है लेकिन कहा है कि इसमें राज्यों को हिस्सेदारी नहीं मिलती, ये धोखा है।
दिल्ली पुलिस को मिले 5913.74 करोड़
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में दिल्ली पुलिस को 5913.74 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। पिछले साल के मुकाबले वर्ष 2016-17 के लिए बजट में 540 करोड़ रुपये ज्यादा देने का प्रावधान किया गया है।
बजट में 300 करोड़ रुपये दिल्ली पुलिस की योजनाओं के लिए दिए गए हैं। वहीं बाकी रकम गैर योजना मद में दी गई है। वहीं, राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पिछले साल की तरह इस बार भी निर्भया फंड 340 करोड़ रुपये रखा गया है।
बता दें कि पिछले साल बजट के दौरान दिल्ली पुलिस को 4979.48 करोड़ रुपये दिए गए थे। मौजूदा साल में इस बढ़ाकर 5913.74 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
सर्विस टैक्स की दरें बढ़ने से आयेगी दिक्कत
दिल्ली के लघु उद्यमियों व कारोबारियों को वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट रास नहीं आया। कारोबारियों की राय है कि मंदी की मार झेल रहे लघु उद्योग को इस बजट से राहत नहीं मिलने जा रही है। उलटे सर्विस टैक्स बढ़ने का असर कारोबार पड़ सकता है।
दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा के मुताबिक, लघु उद्योग फिलहाल मंदी की मार झेल रहा है। उम्मीद थी कि वित्त मंत्री राहत देने वाला कोई कदम उठायेंगे। लेकिन बजट से कोई राहत मिलती नहीं दिखती।
निजी तौर पर बजट हमें निराश कर गया। वहीं, पटपडग़ंज इंड्रस्ट्रियल एरिया के महासचिव एसके महेश्वरी का मानना है कि बजट आशाओं पर खरा नहीं उतरा।
सरकार एक तरफ जीएसटी लागू नहीं कर पा रही है, ऊपर से सर्विस टैक्स की दरें बढ़ा दी। इनकम टैक्स का ढांचा भी पुराना ही रहा। ऊर्जा बचत की बात करने वाली सरकार टैक्स आदि में छूट देकर एलईडी आदि के सस्ते होने का रास्ता भी नहीं खोल सकी।
दूसरी तरफ पालिका बाजार शॉप कीपर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विनय कुमार ने बताया कि बजट में ट्रेडर्स केलिये कुछ भी नहीं है। इतना जरूरी है कि .5 फीसदी सेवा कर बढ़ाने से बिकवाली प्रभावित हो सकती है। अब इतनी उम्मीद है कि केंद्र सरकार अगर रीजनेबल रेट पर जीएसटी लागू करती है तो थोड़ी राहत मिल सकती है।
केंद्रीय बजट में दिल्ली का 2014-15 से अब तक कैसे बढ़ा बजट
दिल्ली सरकार
2014-15
650 करोड़
2015-16
730 करोड़
2016-17
756 करोड़
दिल्ली पुलिस
2014-15
4653 करोड़
2015-16
5372 करोड़
2016-17
5913.74 करोड़
दिल्ली मेट्रो
2014-15
3470.16 करोड़
2015-16
4258.61 करोड़
2016-17
5579.41 करोड़
एम्स
2014-15
1365 करोड़
2015-16
1470 करोड़
2016-17
2043 करोड़