रवीश के सवालों ने खोली बीजेपी के बड़े चेहरे की पोल!
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अपनी तीखे और हल्के फुल्के अंदाज के लिए मशहूर एनडीटीवी के प्राइम टाइम एंकर रवीश कुमार फिलहाल ट्विटर के टॉप ट्रेंड में बने हुए हैं।
मंगलवार को उन्होंने दिल्ली चुनाव में भाजपा की सीएम उम्मीदवार किरण बेदी से कुछ ऐसे सवाल किए जिसने लंबे समय से परदे के पीछे रहे कई रहस्यों पर से परदा उठा दिया।
#RavishAsksBedi के नाम का यह हैशटैग देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। रवीश कुमार इससे पहले भी राजनेताओं के इंटरव्यू लेते रहे हैं लेकिन, ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि इस इंटरव्यू के बाद उन्होंने अपने ब्लॉग पर अपनी राय लिखी और उनका वह ब्लॉग ही खबर बन गया।
रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग में लिखा कि सुबह के पांच बज रहे थे और अचानक सुशील का फोन आया। उन्होंने पूछा कि क्या उनके पास किरण्ा बेदी के इंटरव्यू के अलावा कोई दूसरा प्लान है?
आधे घंटे के लिए भी तैयार नहीं थी किरण बेदी
सुशील उनके शो प्राइम टाइम के इंचार्ज हैं। यह सवाल सुनने के बाद रविश कुमार पेरशान हो गए। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि किरण बेदी उन्हें आधा घंटा देने के लिए भी तैयार नहीं हो रहीं।
रवीश ने हार नहीं मानी और ऑफिस पहुंच टीम के साथ उदय पार्क के लिए चल पड़े। किरण बेदी इसी इलाके में रहती हैं। वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल था क्योंकि ओबामा दौरे के चलते ट्रैफिक बेहद ही धीमा चल रहा था।
तय समय के मुताबिक बिलकुल राइट टाइम पर किरण बेदी ने सड़क पर रविश कुमार से मुलाकात की। रवीश से मिलते ही वह पार्क की ओर चल दीं।
किरण की फिटनेस के कायल हुए रवीश
वह इतनी तेज चल रहीं थीं कि रवीश के लिए उनका पीछा करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन 66 की उम्र में किरण बेदी की इस फिटनेस ने रवीश को कायल कर दिया।
इंटरव्यू शुरु होने से पहले ही किरण बेदी ने रवीश को साफ बता दिया कि उनके पास केवल दस मिनट हैं और इसमें वह जो पूछना चाहें पूछ सकते हैं।
इस इंटरव्यू के बारे में रवीश ने काफी डिटेल में अपने ब्लॉग पर चर्चा की है लेकिन हम आपको उन दो सवालों के बारे में बता रहे हैं जिसने रवीश का यह इंटरव्यू बेहद खास बना दिया।
किरण बेदी ने नहीं उठवाई थी कोई कार
उन्होंने किरण बेदी से पूछा कि क्या इंदिरा गांधी की कार उन्होंने ही उठवाई थी? इस पर किरण बेदी ने जवाब दिया कि नहीं मैंने नहीं उठवाई थी। उन्होंने बताया कि वह कार ट्रैफिक पुलिस के एसआई निर्मल सिंह ने उठवाई थी जो फिलहाल रिटायर हो चुके हैं।
किरण बेदी ने यह भी बताया कि जो कार उठवाई गई थी वह न तो इंदिरा गांधी की कार थी और न ही प्रधानमंत्री के बेड़े की कार थी।
किरण बेदी के अनुसार वह कार प्रधानमंत्री कार्यालय की थी। रविश ने अपने ब्लॉग पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि जिस शख्स ने वह कार उठवाई उसे कोई नहीं जानता।
असल व्यक्ति को नहीं मिली लोकप्रियता
देश भर में इस घटना के बाद किरण बेदी को लोग क्रेन बेदी के नाम से जानने लगे लेकिन जिसने कार उठवाने की हिम्मत दिखाई उसे कोई लोकप्रियता नहीं मिली। जबकि सच्चाई ये है कि जिसने यह काम किया, लोकप्रियता और पार्टी का टिकट तो उसे मिलना चाहिए था।
रवीश को किरण बेदी से पूछे गए दूसरे सवाल के जवाब ने भी चौंका दिया। रवीश कुमार ने किरण बेदी से पूछा कि क्या पॉलिटिकल पार्टियों को अपने खर्च का ब्योरा आरटीआई के तहत देना चाहिए या नहीं?
इस पर किरण बेदी ने कहा कि भाजपा की फंडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसे चुनाव आयोग इसकी ऑडिट भी करता है।
बदल गया किरण बेदी का रूख
रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग में लिखा कि इससे पहले तक किरण बेदी यह मांग करती रहीं थीं कि राजनीतिक दलों को अपने चंदों के बारे में खुलासा करना चाहिए। इसके लिए वह अरूणा राय अरविंद, केजरीवाल और शेखर सिंह के साथ लंबी लड़ाई भी कर चुकी हैं।
राजनीतिक चर्चाओं में वह बीजेपी और कांग्रेस पर हमले करती रही हैं लेकिन भाजपा में आते ही उन्होंने पार्टी को क्लीन चीट दे दी।
रवीश ने लिखा कि किरण बेदी के जवाब से साफ था कि पॉलिटिकल फंडिंग के बारे में किरण बेदी का रूख पूरी तरह बदल चुका था।
पढ़िए, रवीश का पूरा ब्लॉग