हैवान बना पिता, लूटता रहा दो मासूम बेटियों की इज्जत
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पिता द्वारा अपनी ही पुत्रियों से रेप का मामला अत्यंत गंभीर व जघन्य अपराध के समान है। ऐसे व्यक्ति से किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं बरती जा सकती।
हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी अपनी ही दो नाबालिगों से रेप करने वाले दोषी की अपील रद्द करते हुए की। अदालत ने उसे मिली 10 वर्ष कैद की सजा को बहाल रखा है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने 20 अक्तूबर को सुनाए अपने फैसले में दोषी पिता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।
अपनी ही दो बेटियों का किया रेप
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई भी साक्ष्य या मकसद नजर नहीं आता कि उसे फंसाया गया हो। अदालत ने पीड़ित बड़ी बेटी व उसकी मां के बयानों से स्पष्ट है कि दोषी ने रेप किया।
अदालत ने 15 वर्षीय बड़ी बेटी के उस बयान को ठोस आधार माना है कि उसने पहले मात्र इस कारण शिकायत नहीं कि पिता उनकी तीन छोटे भाई बहनों को बेघर कर देगा, लेकिन जब पिता ने उसकी 11 वर्षीय बहन को भी शिकार बनाया तो उससे रहा नहीं गया।
अदालत ने आरोपी से सहानुभूति बरतने से इंकार करते हुए कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि पुत्री से रेप का मामला अत्यंत गंभीर व जघन्य अपराध है। दोषी के खिलाफ 15 व 11 वर्षीय बेटियों के साथ रेप का मामला 20 सिंतबर 2007 को दर्ज किया गया था।