एनसीआर में रैपिड रेल के तीन कॉरिडोर को हरी झंडी
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दिल्ली से मेरठ, अलवर व पानीपत के इन तीनों कॉरिडोर पर जल्द ही काम शुरू होगा। ये रेल कॉरिडोर एलिवेटेड और जमीन दोनों पर होंगे। वहीं, एनसीआर की बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी लाने के लिए बोर्ड से मिलने वाले ऋण पर ब्याज दरें घटाने के साथ इसे चुकता करने की अवधि भी बढ़ा दी गई है।
बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसका फैसला लिया गया। बैठक में केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकार के मंत्री अभिषेक मिश्रा व राजपाल शेखावत समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी व राज्यों के मुख्य सचिव मौजूद थे।
बैठक में बताया गया कि एनसीआर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को फास्ट ट्रैक पर लाने के लिए मंत्रालय ने नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) का गठन करने के साथ प्रबंधन निदेशक की नियुक्ति भी कर दी है। दूसरी तरफ, आरआरटीएस के अलाइनमेंट से जुड़े मसलों का भी समाधान निकाल लिया गया है।
खासतौर से दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर का, जो एनएच-58 के साथ-साथ गुजारेगा। अब इनके डीपीआर पर काम की शुरुआत होगी। नायडू ने बताया कि आरआरटीएस के दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर व दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर की सभी अड़चनें दूर हो गई हैं। यह देश भर के क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था का ट्रेंड सेट करेगा। वहीं, आवाजाही तेज होने से एनसीआर के विकास की तस्वीर भी बदलेगी।
बनने हैं नौ कॉरिडोर
एनसीआर की आवाजाही आसान करने के लिए बोर्ड रैपिड रेल चलाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। बोर्ड के फंक्शनल प्लान ऑन ट्रांसपोर्ट फॉर एनसीआर-2032 में प्रस्ताव है कि एनसीआर के शहरों के लिए 9 आरआरटीएस कॉरिडोर जरूरी हैं।
इनमें दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुडग़ांव-रेवाड़ी-अलवर, दिल्ली-सोनीपत-पानीपत, दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-पलवल, गाजियाबाद-खुर्जा, दिल्ली-बहादुरगढ़-रोहतक, गाजियाबाद-हापुड़, दिल्ली-शाहदरा-बड़ौत शामिल हैं। अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट पर करीब 72 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
जानिये एनसीआरटीसी
एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन आरआरटीएस को जमीन पर उतारेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने जुलाई 2013 मेें इसके गठन को मंजूरी दी थी। उसी साल अगस्त में इसे गठित भी कर दिया गया था। कॉरपोरेशन में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय की कुल हिस्सेदारी 22.5 प्रतिशत, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकारों में हिस्सेदारी 12.5 प्रतिशत तय की गई है। पिछले दिनों इसके प्रबंधन निदेशक की नियुक्ति कर दी गई है।
बुधवार को मंजूर किए गए तीन रैपिड रेल कॉरिडोर
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ : 90 किलोमीटर
दिल्ली-गुड़गांव-रेवाड़ी-अलवर: 180 किलोमीटर
दिल्ली-सोनीपत-पानीपत : 111 किलोमीटर
बैठक में शामिल यूपी सरकार के मंत्री अभिषेक मिश्रा ने बताया कि प्रदेश सरकार की दलील थी कि बेहतर विकास के लिये मुजफ्फरनगर के साथ शामली को भी एनसीआर में शामिल किया जाना चाहिये। बोर्ड बैठक में सैद्धांतिक तौर पर इसकी मंजूरी मिल गई है।
अब इसके तेज विकास की संभावनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि एनसीआर में शामिल होने वाले क्षेत्रों को सब-रीजनल प्लान राज्य सरकारों को तीन महीने में तैयार करना है, जिससे बोर्ड इनके विकास के लिए फंड दे सके।
ऋण पर ब्याज दरें घटाई
बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा अब सस्ती ब्याज दर पर लोन दिया जाएगा। बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाओं से मिलने वाले ऋण की ब्याज दर 7.5 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया। वहीं, लैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए लोन की ब्याज दर 9.25 फीसदी की जगह अब 8.50 फीसदी होंगी।
ऋण वापसी की अवधि बढ़ी
बैठक में मेट्रो और रेल से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए लोन वापसी की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। पहले इसे 10 साल में लौटाना पड़ता था। नये फैसले में यह अवधि 20 साल कर दी गई है।
साथ ही अब दो साल की जगह 5 साल तक राज्यों को ब्याज नहीं देना होगा। अभिषेक मिश्रा के मुताबिक, दोनों फैसलों से राज्यों को काफी सहूलियत होगी। एनसीआर के शहरों का इससे तेजी से विकास होगा।