लंदन के पब में दुष्कर्म मामला: कोर्ट ने वांछित आरोपी की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब, पढ़ें- क्या है पूरा मामला
18 सितंबर, 2020 को यूके सरकार द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय को एक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा गया था। केंद्र सरकार द्वारा नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में 26 मार्च, 2021 को एक शिकायत का मामला दायर किया गया था।
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उच्च न्यायालय ने यूनाइटेड किंगडम में कथित दुष्कर्म मामले में वांछित एक फरार आरोपी की याचिका पर केंद्र सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता ने मई 2017 में लंदन, ब्रिटेन में उसके खिलाफ दर्ज लंदन के एक पब में कथित दुष्कर्म मामले की जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के पूर्ण प्रकटीकरण के लिए निर्देश देने की मांग की है। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने यह निर्देश भारतीय मूल के व्यक्ति और पुर्तगाली नागरिक जोस इनासियो कोटा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 11 मार्च तय की है।
केंद्र सरकार के वकील ने इस आधार पर याचिका पर आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ता निचली अदालत के समक्ष प्रत्यर्पण कार्यवाही में पेश नहीं हो रहा है। याचिकाकर्ता ब्रिटेन में एक दुष्कर्म के मामले में वांछित है और उसके प्रत्यर्पण अनुरोध को ब्रिटेन के अधिकारियों ने मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए दायर किया है। याचिकाकर्ता के वकील अर्पित बत्रा ने तर्क दिया कि भारत और ब्रिटेन के बीच एक संधि है। यूके भारतीय मूल के एक व्यक्ति के खिलाफ जांच के दौरान एकत्र किए गए सभी दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। मूल रूप से गोवा के रहने वाले याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अर्पित बत्रा के माध्यम से याचिका दायर की है।
याचिका में लंदन में जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रूप में पूर्ण रूप से प्रकट करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के साक्ष्य में चिकित्सा साक्ष्य, फोरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, साक्षात्कार की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हो सकती है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इससे याचिकाकर्ता को उसके मौलिक अधिकारों का प्रयोग करने के साथ-साथ उसके लिए बचाव का निर्माण करने में मदद मिलेगी। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को यूके में एक झूठे मामले में फंसाया गया है, जो नस्लीय रूप से प्रेरित है और इस प्रकार याचिकाकर्ता के प्रति भेदभावपूर्ण और पूर्वाग्रहपूर्ण है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रत्यर्पण कार्यवाही ने याचिकाकर्ता को अनुच्छेद 14 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है। याचिका में कहा गया है कि कथित मामला 28 मई 2017 को दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता ने 5 जून, 2017 को लंदन से मुंबई के लिए उड़ान भरी थी। उसका गिरफ्तारी वारंट 11 जून 2019 को यूके कोर्ट द्वारा जारी किया गया था।