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Delhi NCR News: आरएमएल अस्पताल में बंदरों और लावारिस कुत्तों का उत्पात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 07:47 PM IST
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प्याऊ और बेंच पर जमाते हैं डेरा, ओपीडी और वार्डों के आसपास घूमते दिखाई देते हैं लावारिस कुत्ते
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ बंदरों और लावारिस कुत्तों की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर, ओपीडी और कई बार वार्डों के आसपास बंदर और कुत्ते घूमते दिखाई देते हैं। इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बंदरों ने मरीजों के पियाऊ व बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाओं पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। ओपीडी के पर्ची बनवाने आए मरीज व परिजन पानी पीने व भरने प्याऊ आते हैं। जैसे ही वह पानी भरने के लिए आगे बढ़ते हैं, वैसे ही बंदर गुर्राते हुए दांत दिखाने लगता है और काटने को दौड़ता है। इतना ही नहीं, मरीजों का कहना है कि बंदर कई बार उनके हाथ से खाने-पीने का सामान छीन लेते हैं। हालांकि, अस्पताल परिसर में कई जगह लंगूर के कटआउट लगे हुए है, लेकिन बंदरों ने अब उनसे डरना बंद कर दिया है।

मरीजों का आरोप खाने-पीने के लिए आते है बंदर
लोगों का दावा है कि इस समस्या की एक बड़ी वजह कुछ तीमारदारों और अस्पताल कर्मचारियों द्वारा बंदरों और लावारिस कुत्तों को खाना खिलाना भी है। मरीज रमेश कुमार ने बताया कि वह इलाज कराने आए थे। जैसे ही बाहर बैठकर खाना खाने लगा, एक बंदर अचानक आया और उनके हाथ से खाना छीनकर भाग गया। वहीं, तीमारदार किशन ने बताया कि इन बंदरों का झुंड पेड़ में छिपा रहता है, जैसे ही पानी भरने कोई जाते है, उन्हें डराने लगते है। थोड़ा धुतकारने पर काटने के लिए दौड़ा देते है। इससे ये जानवर अस्पताल परिसर में लगातार डेरा जमाए रहते हैं और उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। मरीज व तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। अस्पताल में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।
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वर्जन
आरएमएल अस्पताल की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. वैशाली भारद्वाज ने बताया कि निदेशक की अध्यक्षता में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सीपीडब्ल्यूडी के विद्युत अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। जिसमें बंदरों के आतंक से बचाव और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समग्र योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें कहा गया कि इस समस्या के समाधान के लिए जल्दी ही अस्पताल में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
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