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क्या यही है राहुल-कन्हैया की मुलाकात के सियासी मायने!

Wed, 23 Mar 2016 12:22 PM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Mar 2016 12:22 PM IST
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rahul gandhi and kanahaiya kumar meeting and its meaning
राहुल-कन्हैया की मुलाकात

कन्हैया को देशद्रोही बताने में जहां भाजपा रात दिन एक किए हुए है वहीं कन्हैया की तारीफ में गैर भाजपा राजनैतिक दलों में होड़ सी मची हुई है। पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा के बाद राहुल-केजरीवाल मुलाकात के लोग अलग-अलग सियासी मायने निकाल रहे हैं।

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इस बीच चर्चा यह भी हो रही है कन्हैया के नारों से आजादी शब्द को अपने काम व प्रचार में शामिल करने वाले आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से कन्हैया की मुलाकात तय होकर भी क्यों नहीं हो सकी?
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कुछ दिन पूर्व डी राजा तो मुख्यमंत्री के पास पहुंच गए लेकिन कन्हैया के जाम में फंसने की वजह से उनके न पहुंचने की बात बताई गई। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कन्हैया की केजरीवाल से मिलने में दिलचस्पी नहीं थी।
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मीडिया में इस मुलाकात की खबर आने के बाद केजरीवाल ने कन्हैया के न पहुंचने पर नाराजगी भी जताई थी। इसको इसलिए भी बल मिलता है कि इसके बाद भी दोनों के बीच मुलाकात की कोई कोशिश नहीं हुई।

हालांकि केजरीवाल सरकार ने कन्हैया के भाषण व उसके आजादी के नारों से प्रेरित होकर अपना प्रचार आगे बढ़ाया है। इसी के चलते दिल्ली की विभिन्न सड़कों पर बढ़ते बिजली बिल से आजादी, पानी बिल से आजादी, भ्रष्टाचार से आजादी, नकली वादों से आजादी आदि के होर्डिंग्स लगाए हैं।

'भगवाकरण थोंपने के खिलाफ एकजुट होकर काम करें'

rahul gandhi and kanahaiya kumar meeting and its meaning
राहुल-कन्हैया की मुलाकात

राहुल गांधी से मुलाकात के लिए मंगलवार को कन्हैया अपने कुछ साथियों के साथ अचानक ही पहुंचे। सूत्रों की मानें तो वहां इस पर गहन चर्चा हुई कि आरएसएस व केंद्र सरकार के भगवाकरण थोंपने के खिलाफ अलग-अलग विश्वविद्यालयों व आगामी चुनावों में सभी दल एकजुट होकर काम करें।

इस कड़ी में कन्हैया ने अपना शेड्यूल अलग-अलग राज्यों के विवि में जाने का भी राहुल को बताया। वामपंथी जहां प्रचार में कन्हैया के कूदने की बात कह रहे हैं वहीं जदयू भी कन्हैया की तारीफ लगातार कर रहा है। 

जाहिर है कि सभी संगठनों के एक होने का फायदा गैर भाजपाई दलों व वामपंथियों के फायदे वाला सौदा हो सकता है। वामपंथी नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी सीताराम येचुरी ने तो आसाम और पश्चिम बंगाल के चुनाव में कन्हैया के प्रचार करने की घोषणा भी कर दी थी।

हालांकि कन्हैया इस पर गोलमोल बयान देकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की बात कह चुका है। इसके बाद उसने यूपी में भाजपा की पोल खोलने का बयान दिया तो इसके संकेत मिले कि मामला कुछ और ही है। ऐसे में देखना है कि कन्हैया के साथ राजनैतिक बंसी की तान बजाने में कौन कामयाब होता है।

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