महंगे हो सकते हैं आवंटित DDA फ्लैट
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डीडीए के पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल उठने लगा है। रोहिणी आवासीय प्लॉट योजना 1981 की लड़ाई अदालत में लड़ने वाले राहुल गुप्ता ने डीडीए के ड्रॉ की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इसे लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा भी खटखटाने की बात कही है। हालांकि डीडीए का दावा है कि योजना पूरी तरह से पारदर्शी थी और आरक्षित श्रेणी के जिन आवेदकों के सफल होने को लेकर आरोप लग रहे हैं, वह सभी आवंटी हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। साठगांठ की बात बेमानी है।
राहुल गुप्ता का कहना है कि आवेदन क्रमांक 1145321, 1145322, 1145323 वाले आवेदकों का सीरियल में फ्लैट निकल आया है। इतना ही नहीं आवेदकों के पिता का नाम नसीब चंद व नसीब अविनाश चंद लिखा है। गुप्ता का कहना है कि सभी सफल आवेदक आरक्षित श्रेणी के हैं।
राहुल गुप्ता के इस आरोप पर डीडीए ने सफाई में कहा है कि गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। कंप्यूटर ड्रॉ करने से पहले हर आवेदक को एक रेंडमाइज्ड नंबर दिया गया था। उसी आधार पर फ्लैट आवंटित हुआ। डीडीए प्रवक्ता डॉक्टर नीमोधर ने जारी बयान में ड्रॉ को पारदर्शी बताया है।
डीडीए की पारदर्शिता पर सवाल
ड्रॉ प्रक्रिया सेवानिवृत्त जज की देखरेख में संपन्न हुई है। उधर डीडीए बोर्ड सदस्य जितेंद्र कोचर ने कहा है कि क्रमबद्ध नंबरों के आवेदकों के सफल होने की बात संशय पैदा करती है। इसकी जांच होनी चाहिए।
साथ ही डीडीए हाउसिंग स्कीम 2014 के सफल आवंटियों के लिए डीडीए का वित्त विभाग नए सिरे से फ्लैटों की कीमत तय करने की मशक्कत में जुटा हुआ है। डीडीए सूत्रों का कहना है कि फ्लैटों की कीमत इलाके पर आधारित होगी।
सभी इलाकों में तो ज्यादा प्रभाव नहीं देखने को मिलेगा, लेकिन रोहिणी इलाके में तैयार हो रहे फ्लैटों का भाव बढ़ जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इंजीनियरिंग व वित्त विभाग का आकलन अलग-अलग हो गया है। जिसके कारण फ्लैटों की कीमत में कुछ अंतर देखने को मिल रहा है। यह भी बता दें कि कीमत फ्लोर के आधार पर तय किया जाएगा और डीडीए डिमांड लेटर जारी करेगा।