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काटजूः 'ध्यान रखें सीमा, सम्राट ना बने कोर्ट'

Fri, 21 Aug 2015 04:22 PM IST
Updated Fri, 21 Aug 2015 04:22 PM IST
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Questioned against the decision of High Court, katju sain court give wrong decision

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश(प्रेस काउंसिल के पूर्व चेयरमैन) मार्कंडेय काटजू ने बृहस्पतिवार को एमिटी विश्वविद्यालय में विधि के छात्रों को व्याख्यान दिया।

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कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश कि मंत्रियों, नेताओं एवं अफसरों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़े, ठीक नहीं है। क्योंकि ऐसा कोई भी कानून देश में नहीं है।
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‘‘ न्यायिक सक्त्रिस्यता एवं न्यायिक संयम ’’ पर जानकारी दी। छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब भी दिया।

न्यायाधीशों को अपनी सीमा का ध्यान रखना चाहिए

Questioned against the decision of High Court, katju sain court give wrong decision

इस अवसर पर मेजर जनरल निलेन्द्र कुमार निदेशक, एमिटी लॉ स्कूल ने जस्टिस काटजू का स्वागत किया। जस्टिस काटजू ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायिक सक्त्रिस्यता एवं न्यायिक संयम एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।


कहा कि न्यायाधीशों को अपनी सीमा का ध्यान रखना चाहिए और किसी सम्राट की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने इंग्लैड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर संसद सर्वोच्च है और न्यायालय उनके अधीन है।

ब्रिटिश जज फुटबाल खेल के रेफरी की भूमिका में होते हैं। जो न तो खिलाड़ियों को सलाह देते हैं और न ही खेलते हैं।

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