यादव सिंह की पदोन्नति पर आयोग ने उठाए सवाल
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नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर सीबीआई के साथ ही आयोग का शिकंजा भी कसता जा रहा है। आयोग ने यादव सिंह की पदोन्नति और वेतन वृद्धि में अनियमितता पर सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस एएन वर्मा की अध्यक्षता में गठित आयोग ने प्राधिकरण को पत्र जारी कर पूछा है कि यादव सिंह के अवर अभियंता से चीफ इंजीनियर बनने तक कम समय के अनुभव होने के बावजूद पदोन्नति किस आधार पर दी गई।
पदोन्नति के साथ ही सालाना वेतन वृद्धि में भी तय शर्तों की अनदेखी की गई है। यादव सिंह की वेतन वृद्धि के लिए प्राधिकरण ने गंगाजल प्रोजेक्ट लाने में विशेष भूमिका को आधार बनाया है। प्राधिकरण के कुछ और अफसरों पर भी इसी तरह से सालाना वेतन वृद्धि पर सवाल उठाए गए हैं।
प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि यादव सिंह ने 1980 में जूनियर इंजीनियर के पद पर ज्वाइन किया था। उसके बाद नौ वर्ष में उनको असिस्टेंट इंजीनियर बना दिया गया, जबकि 15 साल का अनुभव होना चाहिए।
असिस्टेंट इंजीनियर से प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाने में भी इसी तरह की जल्दबाजी की गई। असिस्टेंट इंजीनियर से प्रोजेक्ट इंजीनियर बनने के लिए करीब आठ साल का अनुभव होना चाहिए, मगर यादव सिंह को छह साल में ही पदोन्नति मिल गई।
वे 1995 में प्रोजेक्ट इंजीनियर बन गए। सूत्रों ने बताया कि एई और पीई की तरह ही सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर दो साल (1997) में बना दिया गया, जबकि आठ साल का अनुभव होना चाहिए।
इसके बाद चीफ इंजीनियर बनाने में भी जल्दबाजी की गई। आठ साल की जगह पांच साल में चीफ इंजीनियर बन गए। उनके लिए इंजीनियर इन चीफ का पद सृजित किया गया और तीनों प्राधिकरणों के इंजीनियरिंग का चार्ज दे दिया गया। इन सभी पदोन्नतियों में तय समय से पहले पदोन्नति करने पर जवाब मांगा है।
प्रदेश सरकार ने जस्टिस वर्मा आयोग का गठन 10 फरवरी 2015 को किया गया। 10 अगस्त को कार्यकाल समाप्त होने से पहले कार्यकाल बढ़ा दिया गया। यह अवधि 10 फरवरी को समाप्त हो रही है। आयोग की रिपोर्ट फिलहाल पेश नहीं की गई है और न ही इसकी अवधि बढ़ाने की सूचना है। 10 फरवरी को इसकी अंतिम तिथि है। बता दें, कि आयोग भी पदोन्नति, संपत्ति और टेंडरों में अनियमितता की जांच कर रहा है।
यादव सिंह की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने प्राधिकरण और शासन में बैठे कुछ वरिष्ठ अफसरों की भी गिरफ्तारी की मांग की है। नूतन ठाकुर ने सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर ये कार्रवाई न हुई तो वे हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगी।
मौलिक भारत ने भी कोर्ट जाने की दी चेतावनी
मौलिक भारत संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने सेक्टर-33 में प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया है कि यादव सिंह सिर्फ एक मुखौटा हैं, इस खेल में सपा और बसपा के कई वरिष्ठ नेताओं, अफसरों, बिल्डर, ठेकेदार, प्रॉपर्टी डीलर समेत कई नाम भी शामिल हैं। यादव सिंह की डायरी में उनके नाम हैं।
इन सभी को गिरफ्तार करे। ऐसा न करने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। साथ ही दावा किया है कि संस्था की तरफ से 15 जनवरी को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच में ढिलाई बरतने का मुद्दा उठाया गया था। उसके बाद ही सीबीआई ने यादव सिंह को गिरफ्तार किया है।