गजेंद्र को शहीद करार दिए जाने पर उठे सवाल
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जंतर-मंतर पर फांसी लगाकर जान देने वाले किसान गजेंद्र सिंह को दिल्ली सरकार द्वारा शहीद का दर्जा देने के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार के फैसले से आम लोगों में गलत संदेश जाएगा और यह निर्णय आत्महत्या जैसे अपराध को महामंडित करने का है।
अधिवक्ता अवध कौशिक द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार गजेंद्र के आत्महत्या के फैसले को न्यायोचित, समर्थन देकर उचित ठहरा रही है।
कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका
आत्महत्या करना या करने का प्रयास करना भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है। ऐसे मामलों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन दिल्ली सरकार ने गजेंद्र को शहीद का दर्जा देने के अलावा उसके परिवार के सदस्य को नौकरी देने का निर्णय लिया है। उसके नाम पर किसान मुआवजा योजना चलाने की भी घोषणा की है।
सरकार का यह फैसला दूसरों को प्रलोभन देना है और आम लोगों के हित में नहीं है। याचिका में जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की इजाजत देने पर भी रोक लगाने की अपील की है।
याचिका के मुताबिक जंतर-मंतर एक ऐतिहासिक स्मारक है और इसे पर्यटन के लिए बनाए रखा जाना चाहिए।