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QR कोड स्कैम का खुलासा: साउथ की फिल्म देख करने लगा ठगी, स्कैनर और नाम आपका पर रकम जाती थी मनीष के खाते में

Tue, 23 Dec 2025 07:51 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 23 Dec 2025 07:51 PM IST
सार

पुलिस को आरोपी मनीष के मोबाइल फोन से 100 से अधिक क्यूआर कोड, चैट, स्क्रीनशॉट और पेमेंट की डिटेल मिली हैं। आरोपी ने कितने लोगों को इस तरह चूना लगाया, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। 

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QR code scam busted by delhi police one accused arrested from Jaipur
क्यूआर ठगी में बड़ा खुलासा - फोटो : adobe stock

विस्तार

उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने चुपचाप क्यूआर कोड बदलकर ठगी करने वाले एक युवक को जयपुर राजस्थान से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान मनीष वर्मा (19) के रूप में हुई है। आरोपी को दक्षिण भारत की एक मूवी 'वेट्टैयन' को देखकर क्यूआर कोड बदलकर ठगी का आइडिया आया।

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एआई से बदल देता क्यूआर कोड
आरोपी इंटरनेट के जरिए देशभर के नामी स्टोर पर कॉल कर कोई सामान खरीदने की इच्छा जताकर उनका क्यूआर कोड अपने मोबाइल पर मंगा लेता था। बाद में क्यूआर कोड को एआई एप के जरिए चुपचाप बदल दिया जाता था। ऐसा करने के दौरान आरोपी क्यूआर कोड पर मौजूद दुकानदारों के नाम को नहीं बदलता था।

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देशभर में 100 से अधिक कारोबारियों को लगाया चूना
बाद में क्यूआर कोड को वापस दुकानदारों को भेज देता था। क्यूआर कोड दुकानदार के मोबाइल की गैलरी में सेवा हो जाता था। दुकानदार जब भी गैलरी में सेव क्यूआर कोड से पेमेंट लेता था तो पैसे आरोपी मनीष के खाते में पहुंच जाते थे। आरोपी देशभर के 100 से अधिक कारोबारियों को इसी तरह चूना लगा चुका है।

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ऐसे हुआ खुलासा 
पुलिस को आरोपी मनीष के मोबाइल फोन से 100 से अधिक क्यूआर कोड, चैट, स्क्रीनशॉट और पेमेंट की डिटेल मिली हैं। आरोपी ने कितने लोगों को इस तरह चूना लगाया, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। चांदनी चौक इलाके में एक लहंगा खरीदने के दौरान 1.40 लाख की ठगी के बाद इस ठगी के स्कैम का खुलासा हुआ।

ऐसे की गई ठगी....
उत्तरी जिला के पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि 13 दिसंबर 2025 को साइबर थाना पुलिस को 1.40 लाख ठगी की एक शिकायत मिली। पीड़ित ने बताया कि उसने चांदनी चौक में लहंगे की एक दुकान से 2.50 लाख का एक लहंगा खरीदा। पीड़ित ने 1.40 लाख की पेमेंट दुकानदार द्वारा मोबाइल पर दिखाए गए क्यूआर कोड पर की।

साइबर थाना पुलिस ने की छानबीन
पीड़ित के खाते से पैसे कट गए, लेकिन दुकानदार के खाते में पैसे नहीं आए। दुकानदार ने इसका विरोध जताया और कहा कि पेमेंट नहीं हुई है। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने ठगी का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पता किया गया कि पीड़ित के खाते से रकम कहां गई।

जयपुर में पकड़ा गया जालसाज
छानबीन के दौरान पता चला कि रकम जयपुर, राजस्थान के एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हुई थी। पुलिस ने फौरन एक टीम का गठन कर जयपुर भेजा। जयपुर-चकसू के गांव थाली से आरोपी मनीष को दबोच लिया गया। उसने अपना अपराध भी मान लिया। उसके मोबाइल से 100 से अधिक क्यूआर कोड और चैट व अन्य सामान मिला।

ठगी के लिए एआई एप का इस्तेमाल...
आरोपी मनीष ने दक्षिण भारत की वेट्टैयन मूवी देखी। इस फिल्म से उसे क्यूआर कोड बदलकर ठगी का आइडिया मिला। आरोपी ने अपने मोबाइल पर 'एआई इमेज एडिटिंग एप 'डाउनलोड किया। इसकी मदद से आरोपी अपने अकाउंट से लिंक करते हुए क्यूआर कोड तैयार करने लगा। यह सारी जानकारी उसने यूट्यूब से प्राप्त की।

क्यूआर कोड मांगकर बदल देना तस्वीर
इंटरनेट के माध्यम से आरोपी बड़ी दुकान पर कॉल कर सामान खरीदने की बात करता। बातचीत के दौरान आरोपी व्हाट्सएप पर ही क्यूआर कोड मंगवाकर उस पर पेमेंट की बात करता। दुकान का कोई लड़का मनीष को क्यूआर कोड भेजता को आरोपी उससे मिलता-जुलता क्यूआर कोड तैयार कर लेता था।

नहीं बदलता था नाम
बाद में बनाए हुए क्यूआर कोड को बिना नाम बदले पीड़ित के मोबाइल पर भेज दिया जाता था। भेजा गया क्यूआर कोड दुकानदार या उसके कर्मचारी के मोबाइल में सेव हो जाता था। जब भी दुकानदार मोबाइल की गैलरी में मौजूद क्यूआर कोड से पेमेंट लेता तो पैसे सीधे आरोपी के खाते में पहुंच जाते।

चांदनी चौकी की वारदात से हुआ खुलासा
ऐसे में किसी को शक भी नहीं होता था। चांदनी चौक में एक साथ 1.40 लाख रुपये दुकानदार के पास नहीं पहुंचे तो उसने हंगामा कर दिया। इसके बाद वारदात का खुलासा हुआ। आरोपी दसवीं पास है और फिलहाल बेरोजगार है। पुलिस इससे पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।

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