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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Purana Qila will become a living school of 2000 years old India.

Delhi NCR News: पुराना किला बनेगा 2000 साल पुराने भारत की जीवंत पाठशाला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jan 2026 09:47 PM IST
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'कालिदास का कथालोक' कार्यक्रम से होगी इतिहास की समय-यात्रा, युवाओं को मिलेगा मंच
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली का ऐतिहासिक पुराना किला फरवरी में केवल एक स्मारक नहीं रहेगा, बल्कि वह 2000 साल पुराने भारत की जीवंत सांस्कृतिक भूमि में तब्दील होने जा रहा है। 7 और 8 फरवरी को यहां दो दिवसीय 'कालिदास का कथालोक' कार्यक्रम होने जा रहा है, जो दर्शकों को महज नाटक या संगीत नहीं, बल्कि प्राचीन भारत के विचार, जीवन-दृष्टि और संवेदनाओं से रूबरू कराने वाली अनुभवात्मक यात्रा पर ले जाएगा। यह दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव महाकवि कालिदास के युग से प्रेरणा लेकर भारत की बौद्धिक, दार्शनिक और कलात्मक परंपराओं को आज के संदर्भ में जीवित संवाद के रूप में प्रस्तुत करेगा। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन अतीत को महिमामंडित करने के बजाय उसे ईमानदारी से आज के समाज से जोड़ने का प्रयास है।

रंगमंच, संगीत, कथावाचन और कार्यशाला होगी
किले के प्रवेश द्वार से ही दर्शकों का स्वागत पारंपरिक शिल्प, दृश्य-स्थापना, कुम्हारी, मिट्टी-कला, प्राचीन लिपियों का लेखन और भारतीय पारंपरिक खेलों से होगा। वहीं, दिन में विद्वानों, लेखकों और रंगकर्मियों के साथ संवाद सत्र होंगे, जबकि शामें नाट्य प्रस्तुतियों, संगीत, प्रेम, विरह, यात्रा और भक्ति की कहानियों से सजी रहेंगी।
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युवाओं और समकालीन अभिव्यक्तियों पर विशेष जोर
‘कालिदास का कथालोक’ विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी को केंद्र में रखता है। इसी कारण से कॉलेज छात्र, युवा रंगकर्मी और नए कलाकार प्राचीन विषयों को आधुनिक मंच-भाषा में प्रस्तुत करेंगे। आयोजकों ने कहा कि ऐतिहासिक पुराना किला केवल मंच नहीं, बल्कि सुनने, समझने और महसूस करने की जगह बनेगा। इस कार्यक्रम के जरिए युवा अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ेंगे।
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संगीत व नाट्य दलों को खुला न्योता
इसमें भाग लेने के लिए संगीत समूहों, बैंड्स और कोयर दलों को आमंत्रित किया है। चयनित प्रतिभागियों को पुराना किला के भव्य कथालोक मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा। इच्छुक कलाकार www.samayyaan.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आयोजक वर्ष 26 ईस्वी के भारत में जीवन को दर्शाने वाली कहानियों और नाटकों की तलाश भी कर रहे हैं। इन विषयों पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) परामर्श दे रहा है, जो इस महोत्सव का थिएटर पार्टनर है।
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