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1 दशक से सुप्रीम कोर्ट से खेल रहा था लुका-छिपी, अब जेल में चक्की पीसेगा दाल मिल मालिक

Tue, 11 Jul 2017 10:36 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 11 Jul 2017 10:36 AM IST
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pulse mill owner who was astrayed supreme court for 10 years gets jail as token warning
सुप्रीम कोर्ट

एक दशक से अदालत से लुका-छिपी का खेल खेलना दिल्ली के एक दाल मिल मालिक को भारी पड़ गया। मिल मालिक को सुप्रीम कोर्ट ने जेल भेजने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही अवमानना के लिए उसे भारी कीमत भी चुकानी पड़ेगी।

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सोमवार को शीर्ष अदालत ने मिल मालिक को 10 दिन की कैद के साथ-साथ एक करोड़ 32 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है। पीठ ने कहा कि अदालत आदेश पर आदेश पारित करती हैं, लेकिन किसी को चिंता ही नहीं है।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने संजय गुप्ता नामक फैक्टरी मालिक को सात दिनों के भीतर तिलक मार्ग थाने में समर्पण करने को कहा है। पीठ ने जुर्माने की राशि को 1 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश दिया है।

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आदेश की अवहेलना से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘टोकन चेतावनी’ बताया

pulse mill owner who was astrayed supreme court for 10 years gets jail as token warning
सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा ‘यह आदेश उनके लिए एक ‘टोकन चेतावनी’ है, जो अदालती आदेश का पालन नहीं करते और एक के बाद एक झूठ बोल कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के लिए एक ‘विपदा’ है।

पीठ ने तल्खी दिखाते हुए कहा कि अदालत आदेश पर आदेश पारित करती हैं, लेकिन किसी को इसकी चिंता ही नहीं है। भविष्य में कोई सुप्रीम कोर्ट को हल्के में न ले, इसलिए इस तरह का आदेश जरूरी है।’

पीठ ने पाया कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों से फैक्टरी को शिफ्ट करने के अदालती आदेश के बावजूद संजय गुप्ता बापरोला में दाल की मिल चला रहा था, लेकिन वह लगातार झूठ बोलता रहा कि उसने फैक्टरी को शिफ्ट कर दिया है। बापरोला गांव के निवासी ने अवमानना याचिका दायर कर संजय गुप्ता पर आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया था।

अदालत ने सजा के दो विकल्प सुझाए

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : self

पीठ ने अदालत में मौजूद संजय गुप्ता से कहा कि आपको सजा तो जरूर मिलेगी, क्योंकि आपने अदालत को लंबे अर्से तक गुमराह किया है। पीठ ने गुप्ता को सजा के दो विकल्प दिये।

पहला या तो वह वर्ष 2004 से 2015 तक (जिस दौरान गुपचुप फैक्टरी चला रहा था) प्रति महीने एक लाख रुपये के हिसाब से 1 करोड़ 32 लाख रुपये जुर्माना और 10 दिनों की कैद का विकल्प चुने।

दूसरा  वर्ष 2004 से लेकर 2015 तक 10 हजार प्रति महीने के हिसाब से जुर्माना और तीन महीने कैद की सजा भुगते। गुप्ता ने पहला विकल्प चुना, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

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