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Public Transport: दिल्ली में जल्द दौड़ेंगी सहकारी टैक्सियां, अगले महीने से यात्रा हो सकती है सस्ती और सुरक्षित
Sun, 09 Nov 2025 03:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 09 Nov 2025 03:24 AM IST
सार
केंद्र के सहयोग से शुरू होने वाली यह पहल न केवल यात्रियों के लिए सस्ती होगी बल्कि टैक्सी चालकों के लिए भी बिना कमीशन की कमाई का नया अवसर बनेगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में निजी कंपनियों की टैक्सी सेवाओं को टक्कर देने के लिए दिल्ली सरकार सहकारी टैक्सी सेवा शुरू करने जा रही है। केंद्र के सहयोग से शुरू होने वाली यह पहल न केवल यात्रियों के लिए सस्ती होगी बल्कि टैक्सी चालकों के लिए भी बिना कमीशन की कमाई का नया अवसर बनेगी।
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केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से दिल्ली में इस माह भारत टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही है। दिल्ली सरकार और मंत्रालय के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। योजना के तहत टैक्सी सेवा पूरी तरह सहकारी मॉडल पर संचालित होगी जिसमें संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी सहकारी संस्थाओं के पास रहेगी। इस परियोजना के तहत केंद्र के सहयोग से दिल्ली सरकार सहकारिता विभाग को फिर से मजबूती से खड़ा करने की तैयारी कर रही है।
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योजना के लिए भारत टैक्सी नाम से ऐप बनाया जा रहा है जो सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलेगा यानी सेवा प्रदाता कोई कमीशन नहीं लेगा और टैक्सी चालकों को किराये से होने वाली पूरी कमाई अपने पास रखने की अनुमति होगी। इससे यात्रियों को भी सस्ते किराये का लाभ मिलेगा। उम्मीद है कि नवंबर के आखिर तक भारत टैक्सी मोबाइल ऐप सभी मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आ जाएगा और दिल्ली में गाड़ियां सड़कों पर उतर जाएंगी।
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सेवा की फीजिबिलिटी पर काम जारी
दिल्ली सरकार के सहकारिता विभाग के मुताबिक भारत टैक्सी सेवा की डिजाइनिंग और व्यवहार्यता (फीजिबिलिटी) पर काम जारी है। शुरुआती चरण में इसके तकनीकी, आर्थिक और प्रायोगिक पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि योजना तय समय पर शुरू की जा सके। दिल्ली के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में भी इस पर काम चल रहा है।
इसमें बड़ी सहकारी समितियों की भागीदारी
योजना को आठ बड़ी सहकारी समितियों के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें एनसीडीसी, इफ्को, जीसीएमएमएफ (अमूल), एनसीईएल, एनडीडीबी, नाबार्ड, कृभको और नेफेड शामिल हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और निजी ऐप कंपनियों पर निर्भरता घटे।
महिलाओं की सुरक्षा का विशेष ख्याल
महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस सेवा से महिला टैक्सी ड्राइवरों को भी जोड़ा जाएगा। टैक्सियों में इमरजेंसी सिग्नल की सुविधा और मोबाइल ऐप में इमरजेंसी बटन रहेगा, जिससे जरूरत पड़ने पर यात्री सीधे पुलिस से संपर्क कर सकेंगे। दिल्ली सहकारिता विभाग के मुताबिक एक बार ऐप आने पर इसमें वे सभी जरूरी फीचर्स होंगे जो किसी भी कैब ऐप के लिए बेहतर मॉडल बनेगा।
150 से 200 रुपये चुकाने पड़ते हैं 10 किमी के लिए
राजधानी में फिलहाल 1.5 लाख टैक्सियां चल रही हैं जिनमें ज्यादातर निजी कंपनियों से जुड़ी हैं। इन ऐप बेस्ड कैब में 10 किलोमीटर का किराया 150 से 200 रुपये तक होता है जो आम लोगों की जेब पर भारी पड़ता है। नई सहकारी टैक्सी योजना में ड्राइवर और ग्राहक के बीच कोई बिचौलिया नहीं होगा इसलिए किराया स्वाभाविक रूप से सस्ता रहेगा।
पारदर्शी ढांचे में किराया तय होगा
पूर्व आप सरकार ने टैक्सी किराया नियंत्रित करने के लिए एग्रीगेटर पॉलिसी बनाई थी लेकिन किराया तय करने का अधिकार कंपनियों के पास ही रहा। सरकार केवल शिकायत आने पर ही हस्तक्षेप कर सकती थी। नतीजा यह हुआ कि किराया बढ़ता गया और ड्राइवरों व यात्रियों को फायदा नहीं हुआ। सहकारी मॉडल इस समस्या को खत्म करेगा। अब कोई निजी प्लेटफॉर्म कमीशन नहीं लेगा और पारदर्शी ढांचे में किराया तय होगा।
देश में बढ़ता सरकारी टैक्सी मॉडल
केंद्र की सहकारिता टैक्सी योजना से पहले भी कुछ राज्यों ने सरकारी टैक्सी सेवाएं शुरू की थीं। पश्चिम बंगाल में यात्री साथी नाम की टैक्सी सेवा चल रही है जो पहले केवल कोलकाता तक सीमित थी लेकिन अब सिलीगुड़ी, आसनसोल और दुर्गापुर तक फैल गई है। केरल ने 2022 में केरल सवारी ऐप शुरू की था लेकिन सीमित उपयोग के कारण बाद में इसे बंद कर दिया गया। अब दिल्ली में शुरू होने जा रही भारत टैक्सी से उम्मीद की जा रही है कि यह मॉडल सफल होकर देश के अन्य शहरों के लिए मिसाल बनेगा।