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दिल्ली-मेरठ हाईवे की सभी 14 लाइनें पांच घंटे तक रही बंद, राकेश टिकैत के समझाने के बाद खोला गया रास्ता
Sat, 26 Dec 2020 07:08 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 26 Dec 2020 07:08 PM IST
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किसानों ने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे को किया बंद
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली यूपी को जोड़ने वाले गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों ने शनिवार सुबह 11 बजे दिल्ली मेरठ-हाईवे की सभी 14 लेन को बंद कर दिया। एनएच-9 के पूरी तरह बंद होने से बॉर्डर के दोनों तरफ भीषण जाम लग गया। इस दौरान किसानों के वाहन और एंबुलेंस के अलावा किसी को भी हाईवे से नहीं निकलने दिया गया।
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हालांकि, शाम करीब चार बजे भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाकर दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले कैरिजवे को खुलवाया। आंदोलन के चलते गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाला रास्ता पहले ही बंद है।
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एनएच- 9 के बंद होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बॉर्डर के दोनों तरफ बैरिकेडिंग लगा दी। लोग अप्सरा बॉर्डर, आनंद विहार, गाजीपुर चौक और डीएनडी फ्लाईओवर के माध्यम से दिल्ली से आना-जाना कर रहे थे। हाईवे के बंद होने के कारण सभी रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया।
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आनंद विहार पर सबसे खराब स्थिति रही। दिल्ली से गाजियाबाद की ओर जा रहे सभी वाहनों को इसी रास्ते से निकाला जा रहा था। यहां आनंद विहार बस अड्डे से गाजीपुर गांव तक करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। वहीं, गाजीपुर चौक पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया था। यहां भी करीब पांच घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।
शाम करीब चार बजे गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे राकेश टिकैत ने किसानों को समझाते हुए कहा कि यह आंदोलन एक अनुशासन के दायरे में रहकर चल रहा है। किसानों की तरफ से ऐसी कोई गतिविधि न की जाए, जिससे उनकी छवि खराब हो। उन्होंने कहा कि बिना किसान कमेटी और वरिष्ठ किसान नेताओं की आज्ञा के बिना इस प्रकार का कोई भी कार्य नहीं किया जाना चाहिए।
किसानों का कहना था कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से दिल्ली आ रहे उनके साथियों के साथ वहां की सरकारें गलत व्यवहार कर रही है। वहीं, एक माह बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार उनकी मांगों को नहीं सुन रही है। सरकार से नाराजगी के कारण हाईवे को बंद किया गया था।
किसानों का कहना था कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से दिल्ली आ रहे उनके साथियों के साथ वहां की सरकारें गलत व्यवहार कर रही है। वहीं, एक माह बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार उनकी मांगों को नहीं सुन रही है। सरकार से नाराजगी के कारण हाईवे को बंद किया गया था।