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Delhi Metro: फेस-4 के छठे कॉरिडोर को बनाने का रास्ता साफ, 6231 करोड़ के प्रोजेक्ट पर केंद्र ने लगाई मुहर
Sat, 15 Jun 2024 06:17 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Sat, 15 Jun 2024 06:17 PM IST
सार
दिल्ली मेट्रो फेस-4 के छठे व आखिरी रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ हो गया है। सार्वजनिक निवेश बोर्ड ने डीडीए के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। मेट्रो कॉरिडोर पर होने वाले 6,231 करोड़ रुपये खर्च पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है।
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दिल्ली मेट्रो (फाइल फोटो)
- फोटो : X/@OfficialDMRC
विस्तार
दिल्ली मेट्रो फेस-4 के छठे व आखिरी रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर पर होने वाले 6,231 करोड़ रुपये खर्च पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। इस कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के यात्रियों को फायदा होगा। वहीं, नरेला सब-सिटी में आवाजाही भी आसान होगी। करीब 26 किमी लंबे कारीडोर पर डीडीए करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च करेगा। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसका प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट में जाएगा। इसमें मंजूरी मिलने के बाद दूसरी औपचारिकताएं पूरी होंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के 24 महीने में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
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इससे पहले रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय-डीडीए ने प्रस्ताव तैयार किया था। इसे सार्वजनिक निवेश बोर्ड में भेजा गया था। बीते दिनों बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। अधिकारी बताते हैं कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना सब-सिटी नरेला समेत बाहरी दिल्ली के विकास के इस प्रोजेक्ट का अहम माना था। उनकी कोशिश थी कि करीब 20 साल से लंबित इस प्रोजेक्ट को फाइनल करवाया जाए।
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प्रोजेक्ट पर इतना होगा खर्च
इस परियोजना के निर्माण पर कुल 6,231 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें दिल्ली के अंदर होने वाले निर्माण में कुल 5685.22 करोड़ रुपये और हरियाणा की तरफ यह लागत 547.77 करोड़ रुपये होगी। दिल्ली में होने वाले निर्माण में 40 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगा। इसमें डीडीए एक हजार करोड़ रुपये की राशि का वहन करेगा। इसके अलावा 37.5 फीसदी की लागत द्विपक्षीय-बहुपक्षीय ऋणों से, जबकि 20 फीसदी का वहन दिल्ली सरकार करेगी। हरियाणा में होने वाले निर्माण के लिए राज्य सरकार 80 फीसदी अनुदान देगी। केवल 20 फीसदी की राशि का अनुदान केंद्र सरकार खर्च करेगी।
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20 साल से है इस लाइन का इंतजार
इस इलाके में मेट्रो दौड़ाने का प्रोजेक्ट करीब 20 साल से लंबित है। इसको बनाने की योजना सबसे पहले फेज-एक में ही थी। लेकिन प्राथमिकता बदलने से इस दिशा में काम नहीं हो सका। बाद में इस इलाके में मेट्रो लाने की योजना फेज-4 में तैयार की गई। लेकिन इसमें भी अलग-अलग वजहों से अभी तक काम नहीं हो सका। प्रोजेक्ट का अब वित्तीय मंजूरी बोर्ड से मिल गई है।