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एनसीआर के ये 8 जिले बनेंगे फलों व सब्जियों के प्रोडक्शन हब

Fri, 22 Jul 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Fri, 22 Jul 2016 12:08 AM IST
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Production hub of fruits and vegetables in NCR

हरियाणा के गुड़गांव सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के 8 जिले फलों व सब्जियों के प्रोडक्शन हब बनेंगे। इन आठ जिलों का चयन केंद्र सरकार के ‘पैरी अर्बन हॉर्टिकल्चर स्कीम’ के तहत किया गया है।

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इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली एनसीआर में बागवानी विभाग के सहयोग से फलों व सब्जियों की मांग व पूर्ति के अंतर को कम करके हरियाणा के किसानों को उनकी फसलों के वाजिब दाम दिलवाना है।
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इस योजना को लेकर बृहस्पतिवार को हरियाणा कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वीएस कुंडु ने लघु सचिवालय में कृषि, बागवानी, मृदा संरक्षण, एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड समेत कृषि संबंधी अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।

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योजना से जोड़े जा रहे हैं किसान

Production hub of fruits and vegetables in NCR

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि इस योजना से किसानों को भी जोड़ा जा रहा है। इससे हरियाणा के किसानों को फलों व सब्जियों की बिक्री करने के लिए दिल्ली में एक ही प्लेटफॉर्म मिल जाएगा। हरियाणा के चयनित इन जिलों में जल्द ही एक्शन प्लॉन बनाकर आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

इस काम में ‘स्मॉल फारमर्स एग्री बिजनेस कंसोरटियम हरियाणा’ (एसएफएसीएच) किसानों को सपोर्ट सिस्टम प्रोवाइड करेगा। इसके माध्यम से सब्जियों व फलों आदि की कोल्ड स्टोरेज करके इन्हें लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सकता है।

इस दौरान जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में हिमाचल प्रदेश व दक्षिणी भारत से फलों व सब्जियों की मांग को पूरा किया जाता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च अधिक होने से इन वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। जबकि एनसीआर में फलों व सब्जियों की मांग अधिक है।

इन जिलों को किया गया शामिल

Production hub of fruits and vegetables in NCR

गुड़गांव, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक, पानीपत, सोनीपत, पलवल व मेवात को शामिल किया गया है। इन आठ जिलों में सब्जियों, फूलों, फलों, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन आदि पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस योजना के तहत प्रत्येक जिला में एक गांव को ऑर्गेनिक गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। जिसमें किसानों को केमिकल युक्त पैस्टिसाइड अपनाने की बजाय जैविक खेती अपनाने पर बल दिया जाएगा।

आर्गेनिक गांव में उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग किया जाएगा। इस योजना के तहत फसलों में सिंचाई के लिए सोलर बेस्ड पंप सेट भी लगवाए जाने का निर्णय लिया गया है।

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