RPSF जवानों की स्थिति होगी बेहतर: दिल्ली में बनेंगी सुविधाओं से लैस 120 बिस्तरों वाली बैरक, आठ महीने में तैयार
दिल्ली के दयाबस्ती में 33.91 करोड़ की लागत से सिर्फ आठ महीने में सुविधाओं से लैस नया बैरकतैयार होगा। पुरानी जर्जर बैरकों से निजात मिलेगी। आधुनिक तकनीक, मजबूत सामग्री और बेहतर रोशनी-शौचालय की सुविधा से जवानों का रहन-सहन आरामदायक होगा।
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परियोजना को पूरा करने के लिए अनुमानित राशि करीब 33.91 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है और इसे पूरा करने के लिए आठ माह का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना प्राथमिकता में है। चयनित निर्माण एजेंसियों को निर्देश जारी किए जाएंगे कि कार्य में सभी गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाए। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों और अधिकारियों को समय-समय पर समीक्षा बैठकों में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
बता दें कि लंबे समय से आरपीएसएफ कंपनियों के लिए नए बैरक बनाने की मांग की जा रही थी। कई बैरक दशकों पुराने हो चुके हैं। उनके अंदर मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। इनमें न तो उचित रोशनी की व्यवस्था है और न ही स्वच्छ शौचालय और स्नानघर। इसके चलते उत्तर रेलवे ने नए बैरक बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए निविदा भी आमंत्रित की गई है।
विभिन्न केंद्रों पर भी विकसित होंगे आधुनिक बैरक
आने वाले समय में आरपीएसएफ और आरपीएफ के अन्य केंद्रों पर भी इसी प्रकार के आधुनिक बैरक विकसित किए जा सकते हैं। आरपीएसएफ जवानों की संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती और लंबी ड्यूटी के चलते बेहतर आवास सुविधाएं काफी अहम मानी जाती हैं। वर्तमान में कई स्थानों पर उपलब्ध बैरकों की क्षमता भी सीमित है। इससे जवानों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई बार को विशेष परिस्थितियों में जवानों को सरकारी भवनों में ठहराया जाता है।
नई बैरक के निर्माण में आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इसमें स्टील पाइप के साथ फिक्स्ड स्कैफोल्डिंग, वॉल्यूमेट्रिक शटरिंग, उच्च गुणवत्ता वाली सैनिटरी फिटिंग्स, समुचित वॉटरप्रूफिंग समेत कई ऐसी सुविधाएं शामिल होंगी जो भवन की मजबूती, स्थायित्व और उपयोगिता बढ़ाएंगी।वॉल्यूमेट्रिक शटरिंग जैसी तकनीक निर्माण को तेज, सुरक्षित और अधिक टिकाऊ बनाती हैं। वहीं फिक्स्ड स्कैफोल्डिंग से निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों और इंजीनियरों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। यह तकनीक भवन निर्माण में स्थायित्व सुनिश्चित करने में भी सहायक मानी जाती है।