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दिल्ली विधानसभा भंग करने की मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट से मिल गई है। अब अधिसूचना जारी होने के साथ ही विधायकों की जनता की नौकरी (विधायकी) खत्म हो जाएगी। 67 में से 44 ऐसे विधायक हैं जो पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। इनकी विधायकी 9 दिसंबर, 2013 को शुरू हुई थी।
ग्यारह महीने से भी पहले यह विधायकी खत्म हो जाएगी। भाजपा व कांग्रेस के विधायक आर्थिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के कई विधायकों पर असर पड़ेगा। विधायकी खत्म होने पर इन्हें वेतन और डाटा एंट्री ऑपरेटर खर्च के रूप में मिलने वाले मासिक 83.5 हजार रुपये अकाउंट में आना बंद हो जाएंगे।
हालांकि, पहली बार विधायक बनने वालों को मासिक 7.5 हजार रुपये व उससे अधिक का कार्यकाल पूरा करने वालों को प्रत्येक अतिरिक्त साल पूरा करने की एवज में एक हजार रुपये अतिरिक्त पेंशन मिलेगी। परिवार की मेडिकल सुविधा जारी रहेगी। डीटीसी बस पास सुविधा व सैर सपाटे का खर्च बंद हो जाएगा।
ये है AAP विधायकों का हाल
'आप' के 28 विधायक समेत पांचवीं विधानसभा में 45 सदस्य पहली बार चुनकर आए थे। इसमें प्रवेश वर्मा सांसद बन गए। विधायक बनने से पहले सबसे खराब हाल संगम विहार से विधायक दिनेश मोहनिया का था। इनकी वार्षिक आय महज 59 हजार रुपये थी।
बुराड़ी से विधायक संजीव झा की आमदनी भी इतनी नहीं थी कि आयकर रिटर्न दाखिल करें। नकद सिर्फ 68 हजार रुपये थे। राखी बिडलान के पास नकद सिर्फ 50 हजार रुपये और बैंक में 1150 रुपये थे। रिटर्न नहीं भरती थीं।
देवली से विधायक प्रकाश की वार्षिक आय भी महज 1.97 लाख रुपये थी। करोल बाग से विशेष रवि की वार्षिक आय भी 1.03 लाख रुपये व मॉडल टाउन से विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी भी रिटर्न नहीं भरते थे। संपत्ति सिर्फ 1.59 लाख रुपये की थी।
तो बेरोजगार हो जाएंगे AAP विधायक?
केस स्टडी-एक
आप पार्टी के त्रिलोकपुरी से राजू विधायक बनने से पूर्व बेरोजगार थे। नौवीं पास राजू के पास नकद 5 हजार रुपये, बैंक खाते में 1001 रुपये, पत्नी के खाते में 122 रुपये व बच्चे के खाते में 19 रुपये थे। इन पर 40.7 हजार रुपये बिजली कंपनी व एमसीडी का बकाया भी था। विधायक बने तो अकाउंट में मासिक 83.5 हजार रुपये आने लगे।
इतना ही नहीं घूमने के लिए सालाना 35 हजार रुपये, पारिवारिक मेडिकल सुविधा, प्रत्येक बैठक के लिए एक हजार रुपये का भत्ता और फिर विधायकी का रुतबा। अब यह रुतबा खत्म हो जाएगा। फिर चुनाव में पार्टी टिकट देगी या नहीं? अगर टिकट मिली तो जनता मौका देगी या नहीं? यह सवाल चिंतित करने वाले हैं।
केस स्टडी-दो
सीमापुरी से आप विधायक धमेंद्र सिंह दसवीं पास हैं। चुनाव पूर्व इनके पास पैन कार्ड भी नहीं था। नकद 20 हजार रुपये थे और खाते में 800 रुपये। खुद को स्वयं रोजगार से जुड़ा हुआ बताने वाले धर्मेंद्र की वार्षिक आय इतनी नहीं थी कि आयकर रिटर्न जमा कर सकें, लेकिन विधायक बनने पर खाते में मासिक 83.5 हजार रुपये आने लगे। फिर जिला विकास समिति के अध्यक्ष बना दिए गए तो ऑफिस और वाहन की सुविधा भी मिल गई। अब विस भंग होने की अधिसूचना होते है, सब कुछ वापस चला जाएगा।