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तिहाड़ में कैदी कर रहे जेलकर्मियों की पिटाई

Fri, 15 May 2015 06:08 PM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 15 May 2015 06:08 PM IST
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Prisoners became temperamental in tihar, prison personnel are beating

एशिया की सबसे बड़ी व सुरक्षित माने जाने वाली तिहाड़ जेल की सुरक्षा पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं और क्योंकि यहां की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए खेप पहुंचाने की सुरंग बंद नहीं हो रही है।

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हर दिन तिहाड़ जेल की सुरक्षा को कैदियों की ओर से धत्ता बताया जा रहा है। ऐसी वारदातों को रोकने में तिहाड़-प्रशासन अपनेआप को असहाय महसूस कर रहा है।

तिहाड़ में वैसे सभी प्रतिबंधित सामान पहुंच रहे हैं जिसका प्रवेश वर्जित है और उसे रोकने के लिए कई स्तरीय सुरक्षा पहरा की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा पहरा में लगे कर्मियों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
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धड़ल्ले से पहुंच रहे मोबाइल और मादक पदार्थ

Prisoners became temperamental in tihar, prison personnel are beating

सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में पिछले चार दिनों में तीन कैदियों की मौत हो गई और तिहाड़-प्रशासन मूकदर्शक बना रह गया है। तिहाड़ में कैसे हथियार, मोबाइल, मादक पदार्थ और दूसरे प्रतिबंधित सामान पहुंच रहे हैं इसका तिहाड़-प्रशासन के पास कोई पुख्ता जवाब नहीं है।

प्रशासन की ओर से कहा जाता है कि जेल संख्या एक, चार और आठ सड़क से सटा है इसलिए इन जेलों में बाहर से प्रतिबंधित सामान फेंक दिया जाता है, लेकिन यह अपनी गलती छिपाने का एक बहाना मात्र है।

क्योंकि इन तीनों जेलों के अलावा भी दूसरे जेलों से मोबाइल और प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक हर दिन तिहाड़ जेल से औसतन एक मोबाइल फोन बरामद किया जा रहा है। तिहाड़ में मोबाइल जैमर भी लगा है बावजूद फोन का इस्तेमाल हो रहा है यह अपनेआप में तिहाड़-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

कई आतंकवादी और खुंखार अपराधी हैं बंद

Prisoners became temperamental in tihar, prison personnel are beating

पिछले 15 दिनों में जेल संख्या चार में दो बार स्पेशल सर्च टीम ने तंबाकू उत्पाद बरामद किया है। सूत्रों की मानें तो बिना जेलकर्मियों की मदद के प्रतिबंधित सामान जेल के अंदर नहीं पहुंच रहा है। पिछले दिनों ऐसी ही घटना पर जेल संख्या आठ के सात कर्मियों को निलंबित किया गया था।

जेलकर्मियों का कहना है कि जेल में कर्मियों की बहुत कमी है इसी वजह से एक-एक वार्डर और हेड वार्डर पर पांच से सात सौ कैदियों की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। कैदी जेल से बाहर अदालती सुनवाई के लिए जाते हैं तो कई बार उधर से शरीर के अंदर छिपाकर प्रतिबंधित सामान ले आते हैं।

शरीर के अंदर क्या छिपा है इसे स्कैन करने की व्यवस्था तिहाड़ में नहीं है, इसलिए भी दिक्कत हो रही है और ऐसी वारदात बढ़ रही है। तिहाड़ में कई आतंकवादी और हाइप्रोफाइल कैदी बंद हैं।

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