प्राइम लोकेशन प्रॉपर्टी के किराये में 30 से 40 फीसदी तक की औसत कमी, नहीं बिक रहीं दुकानें और फ्लैट्स
- दिल्ली के विकास मार्ग, नोएडा के अट्टा मार्केट और गाजियाबाद की प्राइम लोकेशन पर प्रॉपर्टी के किराए में 30 से 50 फीसदी तक की कमी
- दिवाली के त्योहारी सीजन में भी बहुत सुधार की उम्मीद नहीं देख रहे प्रॉपर्टी विशेषज्ञ
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विस्तार
कोहली एसोसिएट्स के मैनेजर सुरेश कोहली के मुताबिक नोएडा के प्रॉपर्टी बाजार में ठहराव दिख रहा है। अट्टा मार्केट नोएडा के सबसे टॉप बिजनेस लोकेशन में आता है। यह नोएडा के सबसे ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने वाला बाजार है। यही कारण है कि यहां की जगह बिजनेस के लिहाज से सबसे पसंदीदा जगहों में गिनी जाती है।
लेकिन इस टॉप बाजार में भी दुकानों/ऑफिस के किराए में काफी गिरावट दर्ज की गई है। कोरोना काल से पहले जो दुकानें एक से डेढ़ लाख रुपये के किराए पर उपलब्ध मिलती थीं, उनका किराया अब 80 हजार से एक लाख रुपये के बीच आ चुका है। नई दुकानों की बिक्री में भी काफी कमी आ गई है।
श्रीराम प्रॉपर्टीज के प्रमुख देव चौधरी के मुताबिक विकास मार्ग पूर्वी दिल्ली के सबसे टॉप बिजनेस लोकेशन में आता है। कोरोना काल से पूर्व यहां मुख्य रोड पर औसत स्तर की दुकान भी 35 से 40 हजार के किराए पर मिलती थी। आज की स्थिति में ऐसी दुकानें 20 से 25 हजार रुपये तक में मिल रही हैं। टॉप लोकेशन से थोड़ा सा अलग जाने पर 15 से 20 हजार रुपये तक में भी दुकानें उपलब्ध हैं।
कितनी गिरीं कीमतें
मकान.कॉम के मुताबिक ग्रेटर कैलाश-1 में प्रॉपर्टी की कीमतों में 15 फीसदी तक की गिरावट हुई है। रोहिणी इलाके में प्रॉपर्टी की कीमतें 50 फीसदी से भी ज्यादा तक गिरी हैं। पश्चिम विहार के एरिया में लगभग चार फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तम नगर वेस्ट और द्वारका में प्रॉपर्टी की कीमतों में 25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। ईस्ट ऑफ कैलाश जैसी पॉश इलाके में भी प्रॉपर्टी की कीमतें 47.6 फीसदी तक गिर चुकी हैं।
नए फ्लैट की बिक्री भी न के बराबर
दिल्ली-एनसीआर के एक टॉप बिल्डर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस दौरान नए फ्लैट की बिक्री न के बराबर हो रही है। दिवाली सीजन इस बिजनेस के लिहाज से टॉप हुआ करता था, लेकिन इस समय फ्लैट की बिक्री ठहरी हुई है। अधिकारी के मुताबिक फ्लैट्स की कीमतों में कमी आने की संभावना न के बराबर हैं क्योंकि भवन निर्माण में लागत कीमत लगातार बढ़ रही है। वहीं अपनी नौकरी को लेकर आशंकित युवा वर्ग इन कीमतों को चुकाने की स्थिति में नहीं है, जो इन फ्लैट्स के सबसे टॉप खरीदारों में हुआ करता था।