राष्ट्रपति मां के लालच देने पर कॉलेज गए
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बच्चों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि वह कलकत्ता में अध्यापक के तौर पर पहले भी काम कर चुके हैं लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि वह इसके साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं।
इसके बाद उन्होंने अध्यापन का काम छोड़ने का फैसला किया। डाक्टर राजेंद्र प्रसाद सर्वोदय विद्यायलय के छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वह बच्चों की किताबों और उनके पाठ्यक्रम को देख कर बहुत खुश हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि जब वह पढ़ते थे तो उनका पाठ्यक्रम बेहद अजीब था। उन्हें जो इतिहास पढ़ाया जाता था उसमें भारत के इतिहास के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती थी।
इसके कारण की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रपति ने बच्चों को बताया कि जब वह स्कूल या कॉलेज में पढ़ते थे तो उनका पाठ्यक्रम अंग्रेजों द्वारा निर्धारित किया गया था।
पांच किलोमीटर चल कर जाते थे स्कूल
राष्ट्रपति ने बच्चों को बताया कि उनके समय में इतिहास का पेपर 100 नंबर होता था जिसे दो भागों में बांट दिया गया था। इसमें 60 नंबर भारतीय इतिहास के लिए मिलते थे जबकि 40 नंबर ब्रिटीश इतिहास के लिए निर्धारित होता था।
एग्जाम में पास होने के लिए हमें अंग्रेजों का इतिहास पढ़ना पढ़ता था। साथ ही राष्ट्रपति ने बताया कि वो जहां रहते थे वहां से उनका स्कूल पांच किलोमीटर दूर था।
इतना ही नहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं थी। हमें खेतों से होते हुए पैदल चलकर रोज स्कूल जाना होता था। बरसात के समय स्कूल जाने में बहुत परेशानी होती थी।
मां ने दिया लालच तो गए स्कूल
राष्ट्रपति ने बताया कि स्कूल जाने के लिए रोज दस किलोमीटर चलने की वजह से उन्होंने अपनी मां से कहा कि वह रोज इतना नहीं चल सकते। इस दौरान वह कई दिन स्कूल भी नहीं गए।
फिर उनकी मां ने उनसे पूछा कि अगर वो स्कूल नहीं जाएंगे तो क्या करेंगे। फिर भी प्रणव मुखर्जी को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करते हुए उनकी मां ने उन्हें एक लालच दिया।
उनकी मां ने कहा कि अगर वह स्कूल पास कर गए और कॉलेज में एडमिशन लिया तो उनके पिता से कहेंगी कि प्रणव को उसके कॉलेज के पास में ही रहने के लिए रखा जाए।
राष्ट्रपति ने बच्चों को बताया कि उनकी मां ने अपना वादा पूरा किया और कॉलेज में एडमिशन के बाद उन्हें पास में ही रहने की व्यवस्था करवा दी। इस किस्से के बाद महामहिम ने बच्चों को भारत का राजनीतिक इतिहास पढ़ाना शुरु कर दिया।
'मैं पढ़ने में बहुत तेज नहीं था'
राष्ट्रपति ने बच्चों को बताया कि वह पढ़ने में बहुत तेज नहीं थे लेकिन वह बहुत मेहनती थे। अपनी क्लास शुरु करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि हम आजाद 1947 में हुए लेकिन हमारा संविधान 1950 में लागू हुआ तो उनके मन में सवाल पैदा हुआ कि संविधान लागू होने में इतना समय क्यों लगा।
इसके बाद प्रवण मुखर्जी ने बच्चों को बताया कि हमारे संविधान को बनने में लगभग तीन साल का समय लगा। संविधान के निर्माण के लिए तीन सौ लोगों की संविधान सभा का निर्माण किया गया।
उन्होंने बताया कि इस जटिल प्रक्रिया से चुनी गई संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 में हुई और इस बैठक में संविधान सभा के अध्यक्ष का चुनाव किया गया और उसके निर्माण की प्रक्रिया शुरु हुई।
कैसे हुआ राजनीतिक विकास
भारत के संवैधानिक विकास और राजनतिक इतिहास पर निगाह डालते हुए राष्ट्रपति ने बताया कैसे देश के राजनीतिक विकास में राजीव गांधी ने मत देने की सीमा को 21 से घटाकर 18 साल कर दिया।
राष्ट्रपति ने इस प्रक्रिया में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहाराव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने देश में उदारीकरण की प्रक्रिया शुरु की जिससे देश में विकास की गति को बल मिला।
हालांकि इस प्रक्रिया में उन्होंने अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए लोकपाल आंदोलन की भी चर्चा की। राष्ट्रपति ने कहा कि इस आंदोलन ने सोशल मीडिया के प्रभाव को हमारे सामने ला दिया।
कौन हैं राष्ट्रपति की बेस्ट टीचर
राष्ट्रपति ने कहा कि वह अपनी मां को अपनी बेस्ट टीचर मानते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में वह बहुत शैतानी करते थे। जबकि उनके पिता राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहते थे।
लेकिन उनकी मां उनकी हर गतिविधि पर निगाहर रखती थीं। उन्होंने बताया कि छुट्टियों के दौरान वह सुबह होते ही घर से निकल जाते थे और शाम को वापस घर आते थे।
घर आने पर उनकी मां उनसे दिन भर की गतिविधियों के बारे में पूछती थीं और उन्हें पूरी घटना को क्रम से बताना पड़ता था कि उन्होंने पूरे दिन क्या किया।
इसमें किसी भी गतिविधी को छुपाने का मेरा प्रयास सफल नहीं होता था क्योंकि उनकी मां को उनकी सारी दिनचर्या के बारे में पता होता था लेकिन उन्हें बाद में पता चला कि इस तरीके से वह मुझे चीजों को याद करने की आदत डाल रही थीं।
अंत में उन्होंने बच्चों को सवाल पूछने का मौका दिया और उन्हें जवाब भी दिया। राष्ट्रपति ने बच्चों से कहा कि अगर उनके पास अब भी कोई सवाल है तो वह उन्हें लिख कर भेज दें जिसका वह दो से तीन हफ्तों में जवाब दे देंगे।