राजधानी में बिजली की मांग ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, पहली बार 6934 मेगावाट पहुंची डिमांड
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इस साल अधिकतम सात हजार मेगावाट बिजली की मांग का अनुमान लगाया गया है। वहीं, इसकी पूर्ति के लिए अन्य राज्यों के साथ भी करार किया गया है। बिजली कंपनियों का कहना है कि बिजली की मांग 6,926 मेगावाट तक पहुंचना वितरण और संचारण प्रणाली की मजबूती को बताती है।
बीवाईपीएल और बीआरपीएल ने 40 लाख उपभोक्ताओं को आपूर्ति के लिए पर्याप्त इंतजाम का दावा किया है। मेंटेनेंस, कॉल सेंटर सहित अन्य जरूरी सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है। इसके अलावा मांग का सटीक अनुमान भी लगाया जा रहा है।
वहीं, बीएसईएस के अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा मांग बढ़ने पर पीपीए और बैंकिंग व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों के साथ कंपनियों ने करार किया है। इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, तमिलनाडु राज्यों के साथ साथ भूटान भी शामिल हैं।
जून महीने में यह रही मांग
. 8 जून को 6934 मेगावाट।
. 7 जून को 6568 मेगावाट।
. 5 जून को 6562 मेगावाट।
बीते सालों में सर्वाधिक मांग वाले दिन
. 6 जून 2017 को अधिकतम मांग 6,526 मेगावाट थी।
. 1 जुलाई 2016 को अधिकतम मांग 6,261 मेगावाट रही थी।
. 19 जून 2015 को अधिकतम मांग 5,846 मेगावाट थी।
. 15 जुलाई 2014 को अधिकतम मांग 5925 मेगावाट थी।
हर साल 214 मेगावाट की बढ़ रही मांग
बिजली कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग किसी भी महीने में अचानक बढ़ सकती है। अंदाजा नहीं लगा सकते कि कब मांग बढ़ेगी और कब घटेगी।
बारिश देरी से होने पर गर्मी लोगों को अगस्त तक परेशान करती है। इस कारण 2011 में 2 अगस्त को सबसे ज्यादा बिजली की मांग रही थी और 2010 में भी 1 जुलाई को अचानक से मांग बढ़ी थी।
वैसे सामान्य तौर पर जून में बिजली की मांग ज्यादा रहती है। बिजली कंपनी के आंकड़े से पता चलता है कि औसतन हर साल 214 मेगावाट बिजली की मांग दिल्ली में बढ़ रही है।