{"_id":"5c9d6d49bdec22140559b4e8","slug":"pollution-test-centers-will-not-give-fake-certificates-without-scrutiny-in-gautam-buddha-nagar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गौतमबुद्ध नगर में भी मिलेगा फोटो युक्त प्रदूषण प्रमाण-पत्र, 4 केंद्रों को मॉडल के रूप में किया शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौतमबुद्ध नगर में भी मिलेगा फोटो युक्त प्रदूषण प्रमाण-पत्र, 4 केंद्रों को मॉडल के रूप में किया शुरू
Fri, 29 Mar 2019 06:26 AM IST
शाहरुख खान
मनोज कुमार, अमर उजाला, नोएडा
मनोज कुमार, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 29 Mar 2019 06:26 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदूषण जांच केंद्र अब बिना जांच किए फर्जी प्रमाण-पत्र नहीं दे पाएंगे। विभाग ने जांच केंद्रों को साफ्टवेयर वाहन से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। जिले में 4 केंद्रों को जोड़कर मानीटरिंग की जा रही है। चुनाव के बाद जिले के सभी प्रदूषण जांच केंद्र को परिवहन विभाग अपने सिस्टम से जोड़ देगा।
इससे दिल्ली की तरह यहां भी फोटो युक्त प्रदूषण प्रमाण-पत्र वाहन स्वामी को मिलेगा। यूपी में गौतमबुद्घ नगर पहला जिला होगा, जिसमें ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत प्रमाण-पत्र मिल पाएगा।
जिले में 84 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। अधिकतर खराब होने के बावजूद भी प्रमाण-पत्र बनाकर बेच रहे थे। यह बात एनजीटी टीम की जांच में पता चली। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को सुधारा जाए। विभागीय अधिकारियों ने मामले की जानकारी शासन में दी, तो वहां से सभी केंद्रों को अपग्रेड कर उन्हें वाहन साफ्टवेयर से जोड़ने के लिए कहा गया। ताकि वह गलत तरीके से प्रमाण-पत्र न दे पाएं।
विज्ञापन
अधिकारियों ने गौतमबुद्घ नगर में 4 जांच केंद्रों को मॉडल के रूप में सॉफ्टवेयर से जोड़ा है। अब विभाग से मशीन और वाहन को फिट होने का संकेत दिया जाएगा। उसके बाद ही केंद्र से सर्टिफिकेट मिल सकेगा।
विज्ञापन
इससे दिल्ली की तरह यहां भी फोटो युक्त प्रदूषण प्रमाण-पत्र वाहन स्वामी को मिलेगा। यूपी में गौतमबुद्घ नगर पहला जिला होगा, जिसमें ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत प्रमाण-पत्र मिल पाएगा।
विज्ञापन
जिले में 84 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। अधिकतर खराब होने के बावजूद भी प्रमाण-पत्र बनाकर बेच रहे थे। यह बात एनजीटी टीम की जांच में पता चली। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को सुधारा जाए। विभागीय अधिकारियों ने मामले की जानकारी शासन में दी, तो वहां से सभी केंद्रों को अपग्रेड कर उन्हें वाहन साफ्टवेयर से जोड़ने के लिए कहा गया। ताकि वह गलत तरीके से प्रमाण-पत्र न दे पाएं।
विज्ञापन
अधिकारियों ने गौतमबुद्घ नगर में 4 जांच केंद्रों को मॉडल के रूप में सॉफ्टवेयर से जोड़ा है। अब विभाग से मशीन और वाहन को फिट होने का संकेत दिया जाएगा। उसके बाद ही केंद्र से सर्टिफिकेट मिल सकेगा।
इस तरह होगा काम
प्रत्येक प्रदूषण जांच केंद्र को परिवहन विभाग अपने वाहन साफ्टवेयर से जोड़ेगा। जो भी वाहन जांच कराने के लिए आएगा, उसकी प्रक्रिया शुरू करते ही परिवहन विभाग में कंप्यूटर दिखने लगा। इसके बाद यदि वाहन में गड़बड़ी मिली तो उसका प्रमाण-पत्र मिलेगा।
यदि सही है तो वो ही प्रमाण-पत्र मिल सकेगा। केंद्र संचालक गड़बड़ी नहीं कर पाएगा और ऑनलाइन ही सर्टिफिकेट मिलेगा। हाथ से बनाया गया सर्टिफिकेट बंद हो जाएगा।
दिल्ली की तर्ज पर अब गौतमबुद्घ नगर के प्रदूषण जांच केंद्रों को भी वाहन साफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। जिससे फर्जी प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो सकेंगे। विभाग का वाहन साफ्टवेयर जब ओके की रिपोर्ट देगा तो ही जांच केंद्र से प्रमाण-पत्र मिल पाएगा।
- संजय माथुर, उप परिवहन आयुक्त, मेरठ
यदि सही है तो वो ही प्रमाण-पत्र मिल सकेगा। केंद्र संचालक गड़बड़ी नहीं कर पाएगा और ऑनलाइन ही सर्टिफिकेट मिलेगा। हाथ से बनाया गया सर्टिफिकेट बंद हो जाएगा।
दिल्ली की तर्ज पर अब गौतमबुद्घ नगर के प्रदूषण जांच केंद्रों को भी वाहन साफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। जिससे फर्जी प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो सकेंगे। विभाग का वाहन साफ्टवेयर जब ओके की रिपोर्ट देगा तो ही जांच केंद्र से प्रमाण-पत्र मिल पाएगा।
- संजय माथुर, उप परिवहन आयुक्त, मेरठ