शपथ ग्रहण समारोह में शिक्षकों को बुलाने पर राजनीति गर्म, अटेंडेंस को लेकर पीछे हटी सरकार
- शिक्षकों को बुलाए जाने पर राजनीति गरमा गई है
- उपराज्यपाल से हस्तक्षेप करने की उठी मांग
- शिक्षकों के अटेंडेंस मामले में पीछे हटी सरकार
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अरविंद केजरीवाल के शपथ ग्रहण समारोह में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को बुलाए जाने पर राजनीति गरमा गई है। एक तरफ जहां सरकारी स्कूल शिक्षक संघ ने इस फरमान को लेकर आपत्ति जताई है तो दूसरी तरफ भाजपा ने दिल्ली के उपराज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही कहा कि अलोकतांत्रिक तरीके से जारी किए गए सर्कुलर का उपराज्यपाल संज्ञान लें।
रविवार को रामलीला मैदान मे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को भी आने को कहा गया है। शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रत्येक स्कूल के प्रिंसिपल को अपने साथ 20 शिक्षक लाने के निर्देश हैं। रविवार का दिन होने के कारण शिक्षकों का अवकाश है। ऐसे में शपथ ग्रहण में शामिल होने को लेकर शिक्षक आपत्ति जता रहे हैं।
सरकारी स्कूल शिक्षक संघ के महासचिव अजय वीर यादव का कहना है कि पहली बार शपथ ग्रहण समारोह में छुट्टी के दिन अनिवार्य रूप से एक स्कूल से कम से कम 20 शिक्षक व स्कूल प्रमुख को बुलाना निंदनीय है। यादव ने इसे तुगलकी फरमान बताया है।
पीछे हटी दिल्ली सरकार
वहीं, शिक्षकों को शपथ ग्रहण में बुलाने पर विवाद के बाद दिल्ली सरकार एक कदम पीछे हटते दिख रही है। सरकार ने अब यह फैसला लिया है कि शिक्षकों का अटेंडेंस नहीं लिया जाएगा।
भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। गुप्ता ने ट्वीट कर कहा है कि सरकारी शिक्षकों को निर्देश जारी कर समारोह में बुलाना अलोकतांत्रिक है। सम्मान देने और जबरन बुलावा देने में फर्क होता है। आम आदमी पार्टी के तानाशाही रवैये का भाजपा विरोध करती है। केजरीवाल शिक्षकों का अपमान करना बंद करें।
भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को भरोसा नहीं है कि उनके समारोह में लोग आएंगे। 600 बस की व्यवस्था की गई है और 6000 लोगों के खाने का इंतजाम किया गया है।
बेवजह तूल देने की जरूरत नहीं : सिसोदिया
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछले पांच साल में शिक्षा के क्षेत्र में जो भी बदलाव हुए हैं उसमें शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों की बड़ी भूमिका रही है। वह इसे महसूस भी करते है। आम आदमी पार्टी के जीतने के बाद बहुत सारे शिक्षकों के संदेश आए हैं कि वह शपथ ग्रहण में शामिल होना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल ने खुद भी पूरी दिल्ली को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। जिसे दिक्कत है वह नहीं भी आ सकता है। इस तरह के बेवजह के मसलों को तूल देने की जरूरत नहीं है।