विधानसभा सत्र पर चढ़ा सियासी पारा, नगर निगम ने बताया असंवैधानिक
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दिल्ली सरकार की ओर विधानसभा का सत्र बुलाए जाने पर राजधानी में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। नगर निगम के मेयरों और अन्य वरिष्ठ पार्षदों ने सोमवार को दिल्ली सरकार पर चौतरफा हमला किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने अपनी नाकामियां छिपाने और तीनों नगर निगमों को बदनाम करने के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया है।
उन्होंने इस सत्र को पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए उपराज्यपाल से दिल्ली सरकार की शिकायत करने का एलान किया। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद और दक्षिण दिल्ली नगर निगम में सदन नेता सुभाष आर्य के साथ तीनों नगर निगम के मेयरों श्याम शर्मा, सत्या शर्मा तथा संजीव नैय्यर ने सिविक सेंटर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दिल्ली सरकार पर कई आरोप लगाए।
उन्होंने दिल्ली सरकार को अपने कामकाज के साथ तुलना करने की चुनौती दी। साथ ही कहा कि अगर उनका काम कम मिला, तो वे अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे।
उपराज्यपाल से दिल्ली सरकार की शिकायत करेंगे मेयर
सुभाष आर्य ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ पूरे करने के लिए लगातार राजनीतिक हथकंडे अपना रही है। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।
दिल्ली सरकार ने विधानसभा में विपक्ष की आवाज को कुचल रखा है। संजीव नैय्यर ने आरोप लगाया कि कि दिल्ली सरकार ने अपने अधीन बिजली, पानी और सीवेज के काम में कोई उपलब्धि हासिल नहीं की।
सरकार बार-बार किसी न किसी मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाती है, जिससे नागरिकों का ध्यान सरकार की विफलताओं से हटाया जा सके।
सत्या शर्मा ने कहा कि नगर निगम ने सफाई उपनियम मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार के पास भेज रखे हैं, लेकिन उन पर विचार करने के लिए केजरीवाल सरकार को समय नहीं मिल रहा है।
वहीं, श्याम शर्मा ने कहा कि नगर निगमों ने मानसून से पहले अपने नालों से हजारों टन गाद निकालकर अपनी सक्षमता का परिचय दिया। मगर दिल्ली सरकार ने बड़े नालों से गाद निकालने के काम को गंभीरता से नहीं किया। अब भी ये नाले गाद और कूड़े से लबालब हैं।